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मकर संक्रांति का संदेश

उत्तर भारत के कुछ राज्यों में मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। हमारा खान-पान ही हमारे स्वास्थ्य को निधार्रित करता है। अच्छा खान-पान अच्छा स्वास्थ्य और गलत खान-पान हमें बीमार करता है। जब भी मौसम बदलता है, तब हमें विशेषज्ञ डॉक्टर खान-पान पर ओर ज्यादा ध्यान देने की बात करते हैं। मकर संक्रांति हमें शुद्ध खान-पान की शिक्षा देती है। हमारे बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि लोहड़ी के बाद सर्दी की विदाई का समय आ जाता है।
हमारे देश में त्योहारों पर तरह-तरह के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। यह व्यंजन सेहत के लिए बहुत लाभकारी होते हैं। आज जिस तरह लोगों की दिलचस्पी फास्ट फूड और अन्य गलत खान पान की ओर बढ़ चुकी है, जो कि सेहत के दुश्मन बन रहा हैं, उसके लिए तो अब ओर भी जरूरी हो गया है कि लोग उस खान-पान की तरफ आकर्षित जो सेहत के लिए लाभदायक हो।
हमारे देश में उत्तर भारत के कुछ राज्यों में लोहड़ी के अगले दिन मकर संक्रांति पर खिचड़ी बनाने, खाने-खिलाने का रिवाज और परंपरा है। खिचड़ी भारत का सबसे प्राचीन व्यंजन है। वेद-नीम-हकीम और आधुनिक डॉक्टर भी रोगियों को खिचड़ी खाने की ही सलाह देते आए है। खिचड़ी को देश का राष्ट्रीय व्यंजन बना देना चाहिए। खिचड़ी के लाभकारी गुणों को देखते हुए हरेक भारतीय को कम से कम सप्ताह में एक बार इसका सेवन जरुरी करना चाहिए, ताकि भारत निरोग बनने में एक कदम ओर आगे बढे। मकर सक्रांति का पर्व हमें यह भी संदेश और शिक्षा देता है कि हमें उसी तरह कोई भेदभाव नहीं करना चाहिए, जिस तरह सूर्य अपना प्रकाश और ऊर्जा देती बार किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करता।
मकर संक्रांति पर लोग पावन नदियों और घर पर ही रहकर गंगा जल पानी में डालकर नहाने की परंपरा भी है, जो कि हमें स्वच्छता अपनाने का संदेश भी देती है। लेकिन हमें यह भी ख्याल रखना चाहिए कि हमें पवित्र नदियों को गंगा नहीं करना चाहिए। लोग गंगा नदी के किनारे जाते है पुण्य कमाने, लेकिन गंगा में पॉलीथीन या अन्य गंदगी डालने से भी परहेज नही करते, फिर यह क्या पाप हुआ या पुण्य, यह कैसी संस्कृति है?
राजेश कुमार चौहान
जालंधर

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