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मुंबईकरों की ट्रैफिक समस्या को दूर करने में असफल साबित हुई मेट्रो लाइन २A और ७ मुंबईकरों का एक यही सवालकब होगा मेट्रो का सुहाना सफर?

अनिल कुमार चौरसिया

दिसंबर २००२ में दिल्ली में मेट्रो पहली बार दौड़ी थी, जिसके बाद वर्ष २००४ में मुंबई में भी १४६.५ किलोमीटर मेट्रो लाइन विभिन्न मार्गों पर चलाने का मास्टर प्लान एमएमआरडीए द्वारा तैयार किया गया, लेकिन बहुत सारी समस्याओं के कारण एमएमआरडीए सिर्फ वर्सोवा से घाटकोपर तक कुल ११.४ किलोमीटर मेट्रो लाइन-१ चलाने में ही सफल हो पाई। वर्ष २०१५ में ११८ किलोमीटर का फिर से मास्टर प्लान तैयार किया और इस मास्टर प्लान में सबसे ज्यादा जोर दहिसर-पूर्व से अंधेरी-पूर्व लाइन-२ और अंधेरी-पश्चिम से दहिसर-पश्चिम लाइन-७ को बनाने का प्लान बनाया गया, लेकिन कोविड के कारण मेट्रो का काम कुछ समय के लिए ठप हो गया। कोविड़ खत्म होने के बाद मेट्रो बनाने का काम फिर से चालू हुआ और पहले चरण में आरे स्टेशन से दहिसर-पूर्व और दहिसर-पश्चिम से दहाणूकरवाड़ी तक का उद्घाटन महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे द्वारा किया गया और बाद में जून २०२३ में पूरी तरह मेट्रो खोल दिया गया।

मुंबईकरों को नहीं मिली राहत पश्चिम द्रुतगति मार्ग पर नहीं हुआ ट्रैफिक कम

लोकल ट्रेन में होनेवाली भीड़ को कम करने, पश्चिमी द्रुतगति मार्ग पर होनेवाले भयंकर ट्रैफिक को कम करने के लिए के लिए मेट्रो की इन लाइनों के चालू होने पर मुक्ति मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पश्चिमी द्रुतगति मार्ग पर अभी भी लोगों को ट्रैफिक की भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है, इसका मुख्य कारण मेट्रो की इन लाइनों पर अभी भी प्रवास करनेवाले यात्रियों की संख्या बहुत कम है, उसका सबसे बड़ा कारण लोकल के मुकाबले मेट्रो का किराया और प्रâीक्वेंसी की कमी होना है। रेलवे विभाग ने भी एसी ट्रेन का किराया आधा कर दिया है, जिसके कारण मेट्रो को वैसा रिस्पॉन्स नहीं मिल पा रहा है।
मेट्रो लाइन २A और ७ के अधिकतर स्टेशन हाईवे पर हैं और लोकल ट्रेन के करीब हैं। इसलिए दूर रहनेवाले मेट्रो की जगह लोकल से सफर करना पसंद करते हैं, क्योंकि मेट्रो के पास से अंदर जाने के लिए बस की सुविधा उपलब्ध नहीं है और ऑटोरिक्शा या प्राइवेट गाड़ी का खर्च आम आदमी को प्रतिदिन महंगा पड़ता है। मेट्रो की सुविधा को आम मुंबईकर की लाइफलाइन बनाने के लिए मेट्रो के सभी प्रोजेक्ट का तय समय पर पूरा होने के साथ-साथ किराए में रियायत, मासिक पास और छुट्टी के दिनों में लोगों को आकर्षित करने के लिए विशेष योजना और प्रâीक्वेंसी बढ़ाने के साथ-साथ कनेक्टिविटी बढ़ाने की जरूरत है।

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