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चार गुना कम हुआ म्हाडा का वेटिंग जोन … गरीबों की उम्मीद का ‘आरक्षण’ भी सिमटा!

अभिषेक कुमार पाठक / मुंबई
महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (म्हाडा) के मुंबई बोर्ड द्वारा आवंटित ४,०८२ फ्लैटों की लॉटरी १४ अगस्त को निकाली गई थी। बता दें कि म्हाडा द्वारा पहले लॉटरी के समय घर दिए जानेवाले वेटिंग लिस्ट में ४० प्रतिशत की वेटिंग रखी जाती थी। मगर इस बार म्हाडा लॉटरी में वेटिंग लिस्ट सिमटकर चार गुना रह गई है। यानी कम होकर १० प्रतिशत पर आ गई है। इस कमी ने आरक्षण की संख्या को कम कर दिया है।
यशवंतराव चव्हाण केंद्र में आयोजित कार्यक्रम में हर्षोल्लास के साथ ड्रॉ निकाला गया। ड्रॉ में सफल होने वालों के चेहरे पर खुशी थी, वहीं कई नए लोग वेटिंग लिस्ट में थे और आज भी इन घरों के लिए उम्मीद बाकी है। लेकिन इस साल के ड्रॉ में वेटिंग लिस्ट कम होने से कई लोगों का घर का सपना अधूरा रह जाएगा। इस साल के ड्रॉ से पहले ही म्हाडा ने लोगों की पात्रता निर्धारित कर दी थी। जिन लोगों को मकान मिला है, वे सभी पात्र हैं। वे सिर्फ भुगतान करना चाहते हैं और अपने घर पर कब्जा चाहते हैं, इसलिए इस बार वेटिंग लिस्ट कम कर दी गई है। इस ड्रॉ में प्रत्येक वैâटेगरी में घरों की कुल संख्या की १० प्रतिशत की वेटिंग लिस्ट है, जो कि पिछले कुछ सालों पहले घरों में वेटिंग संख्या ४० प्रतिशत की जाती थी।
इससे पहले, ड्रॉ प्रक्रिया में शुरुआत में केवल आवेदन प्रक्रिया शामिल होती थी। ड्रॉ के बाद उम्मीदवारों की पात्रता की जांच की जाती थी, इसलिए आवंटन प्रक्रिया में सफल होने के बाद भी कई लोग अयोग्य हो जाते हैं और इस प्रकार उन्हें अपात्र न होने पर घरों का अधिकार छोड़ना पड़ता है। इसका लाभ वेटिंग लिस्ट के लोगों को मिला करता था। हालांकि, अब जब शुरुआत में ही पात्रता निर्धारित कर दी गई है तो वेटिंग लिस्ट में शामिल आवेदकों को घर मिलने की उम्मीद खत्म हो गई है, लेकिन अब जिन लोगों को लॉटरी में एक से ज्यादा घर मिले हैं या जो पुराना घर नहीं खरीदना चाहते, वे घरों को सरेंडर कर देंगे।

क्या कई घर बिना बिके रह जाएंगे?
मुंबई बोर्ड ड्रॉ में पहले सभी आय वर्ग की प्रतीक्षा लिस्ट में अधिक नाम शामिल किए जाते थे, लेकिन अब सिर्फ चुनिंदा लोग ही वेटिंग लिस्ट में हैं। इसलिए यदि अधिक लोग घर छोड़ देते हैं तो भी संभावना है कि कई घर बिना बिके रह जाएंगे, क्योंकि प्रतीक्षा सूची में मूल रूप से कम लोग हैं। यदि प्रतीक्षा सूची में शामिल सभी लोगों को मकान मिल भी गया तो भी शेष मकान सामान्य वर्ग को दिए जाएंगे। यदि विशेष श्रेणी के पात्र आवेदक मकानों पर अपना अधिकार छोड़ देते हैं तो वे मकान अगली श्रेणी में आ जाते हैं जबकि आरक्षित मकान सामान्य वर्ग के नागरिकों को दिए जाते हैं।

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