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चिकित्सा क्षेत्र में चमत्कार! मुंबई में प्रत्यारोपित हुआ एशिया का पहला सैपियन-३ ट्राइकसपिड वाल्व

  • नहीं करना पड़ा चीर-फाड़

सामना संवाददाता / मुंबई
चिकित्सा क्षेत्र रोज नई-नई उपलब्धियां हासिल कर उड़ान भर रहा है। इसी कड़ी में मुंबई में बिना किसी चीर-फाड़ के एक ६३ वर्षीय महिला में सैपियन-३ ट्राइकसपिड वाल्व प्रत्यारोपित किया गया है। इतना ही नहीं महिला को ४८ घंटे से भी कम समय तक निगरानी में रख चिकित्सकों ने उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी। बताया गया है कि एशिया में इस तरह का वाल्व पहली बार बैठाया गया है।
मुंबई निवासी ६३ वर्षीय महिला प्रफुल्ल शाह की ट्राइकसपिड वाल्व में संकुचन के चलते साल २००५ में ओपन हार्ट सर्जरी की गई थी। सर्जरी के १५ साल बाद मरीज को बार-बार सांस लेने में तकलीफ होने लगी। पिछले छह महीनों में मरीज की हालत इतनी बिगड़ गई कि वह कुछ कदम से ज्यादा नहीं चल पा रही थी। जांच में पता चला कि उसमें लगा पुराना सर्जिकल वॉल्व खराब हो गया है।
चिकित्सकों के सामने थी बड़ी चुनौती
सर एचएन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के टीएवीआर और स्ट्रक्चरल हार्ट प्रोग्राम प्रमुख डॉ. मौलिक पारेख ने कहा कि महिला मरीज का एक और ओपन हार्ट सर्जरी से जटिलताएं हो सकती थीं। यहां तक कि यह उसके लिए घातक भी साबित हो सकता था। इसे देखते हुए पेसमेकर लगाने और मरीज की गंभीर ट्राइकसपिड रेगुर्गिटेशन और संकुचन की गंभीर स्थिति को देखते हुए हमने मरीज के लिए सबसे प्रभावी उपचार विकल्प के रूप में ट्रांसकैथेटर ट्राइकसपिड वाल्व रिप्लेसमेंट को चुना।
एक साथ बदले गए चार हार्ट वाल्व
महिला मरीज का करीब डेढ़ घंटे टीटीवीआर सर्जरी हुई। वहीं मरीज को एक भी टांके लगे बिना हुई सर्जरी के ४८ घंटों बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। दूसरी तरफ मुंबई का यह अस्पताल ट्रांस-कैथेटर (नॉन-सर्जिकल) तकनीक के माध्यम से सभी चार हार्ट वाल्वों को बदलने वाला पश्चिमी क्षेत्र का पहला अस्पताल बन गया है।

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