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देश को गुमराह करना जारी है! : एलएसी से सटकर चीन बना रहा है  सर्विलांस रडार और इंफ्रास्ट्रक्चर

•  कब तक गुमराह करेगी सरकार?
सामना संवाददाता / नई दिल्ली
चुनावी लाभ के लिए राम मंदिर, अनुच्छेद ३७०, हिजाब, हलाला, मस्जिदों के भोंगे, सर्जिकल स्ट्राइक आदि मुद्दों को भुनाने का लगातार प्रयास करनेवाली भाजपा और केंद्र की उसकी सरकार पीएम नरेंद्र मोदी का वैश्विक नेता के तौर पर लगातार प्रचार करती रही है। चंद्रयान-३ की चंद्रमा पर सफल लैंडिंग के बाद भाजपा द्वारा मोदी को वैश्विक नेता के रूप में देश में प्रचारित करने के प्रयास और तेज हुए हैं। इन्हीं प्रयासों के तहत एलएसी पर जारी गतिरोध को दूर करने के मकसद से ब्रिक्स सम्मेलन के आसपास चीन के साथ हुई वार्ता के सकारात्मक रहने का प्रचार किया गया। इतना ही नहीं ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान गुरुवार को पीएम मोदी की जिनपिंग से हुई मुलाकात की पेशकश चीन द्वारा की गई थी, ऐसी बातें भी बढ़ा-चढ़ाकर पैâलाई गर्इं लेकिन अब चीन की ओर से किए गए खुलासे से भाजपा द्वारा किया गए प्रयासों पर सवाल उठने लगे हैं। दूसरी ओर अमेरिकी कंपनी मैक्सार टेक्नोलॉजीस द्वारा जारी की गई एलएसी की ताजा तस्वीरें शांतिवार्ता की आड़ में चीन द्वारा की जा रही घुसपैठ की पोल खुल गई है।
‘हिंदी-चीनी, भाई-भाई’ के नारे और उसके बाद में १९६२ में चीन के हिंदुस्थान पर आक्रमण को लगभग ५० वर्षों से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन पीठ पर छुरा घोंपने की अपनी फितरत से चीन बाज नहीं आता है। ब्रिक्स समिट को लेकर चीन के दावे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच मुलाकात हिंदुस्थान के अनुरोध पर हुई, ऐसे चीन के दावे की सच्चाई तो पीएम मोदी ही जानते होंगे। लेकिन चीन का यह दावा कि सीमांत इलाके में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए वह जोर दे रहा है, एक छलावा मात्र ही है।
मैक्सार टेक्नोलॉजीस नामक अमेरिकी कंपनी द्वारा खींची गई सैटेलाइट तस्वीरों से यह साफ हो जाता है कि पश्चिम सीमा पर चीन इंप्रâास्ट्रक्चर बढ़ा रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों के अनुसार, चीन एलएसी से लगभग ६५ किलोमीटर की दूरी पर तकरीबन ढाई सौ हेक्टेयर इलाके में सर्विलांस रडार, सड़कें आदि का निर्माण कर रहा है। खास बात यह है कि यह पूरा इंप्रâास्ट्रक्चर हाल के महीनों में बनाया गया है। ये वो वक्त था, जब दोनों देश सीमा विवाद सुलझाने के लिए बातचीत की टेबल पर साथ आए थे। सैटेलाइट तस्वीरों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे इस साल बर्फ पिघलने के बाद चीन ने यहां इंप्रâास्ट्रक्चर बनाना शुरू किया था। १८ अगस्त को ली गई तस्वीर में चीन की सेना के वायएलसी-४ और वायएलसी-८ को देखा जा सकता है। ये दोनों लंबी दूरी के सर्विलांस रडार हैं। खबरों की मानें तो अक्साई चिन में चीन ने सड़कें, रिहायशी इकाइयां और प्रशासनिक इमारतें तक बना ली हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि इनका सामरिक इस्तेमाल किया जा सकता है।
गौरतलब हो कि २०२० के मई-जून महीने में हिंदुस्थान और चीनी फौजियों बीच खूनी संघर्ष हुआ था। गलवान घाटी से लगे हिंदुस्थानी क्षेत्र में एक अस्थाई ब्रिज निर्माण को लेकर चीन ने आपत्ति जताई थी। यह बात उल्टा चोर कोतवाल को डांटने जैसी हो गई है। उस वक्त आपत्ति जताने वाला चीन लगातार निर्माण कार्य किए जा रहा है और साथ ही एलएसी पर शांति और स्थिरता बनाने की बात भी कर रहा है। यह बात दीगर है कि उसकी चोरी अंतरराष्ट्रीय तौर पर खुलकर सामने आ रही है।

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