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भाजपा के टिकट पर लड़ने को तैयार हैं दादा-शिंदे गुट के विधायक और सांसद!… राकांपा विधायक जितेंद्र आव्हाड का दावा

सामना संवाददाता / मुंबई

आगामी लोकसभा और विधान सभा चुनाव में अजीत दादा और शिंदे गुट के विधायकों को भाजपा के टिकट पर लड़ना होगा और दोनों दलों के विधायक व सांसद खुद भाजपा के टिकट पर लड़ने को तैयार हैं, ऐसी परिस्थिति तीनों दलों की है, यह दावा राकांपा के राष्ट्रीय महासचिव और विधायक जितेंद्र आव्हाड ने किया है। आव्हाड ने आगे कहा कि पार्टी और चुनाव चिह्न को लेकर चुनाव आयोग के समक्ष बहस पूरी हो चुकी है। आयोग ने पैâसला सुरक्षित रख लिया है और कभी भी पैâसला आने की उम्मीद है, ऐसी स्थिति में सुनील तटकरे का यह बयान कि पार्टी और चुनाव चिन्ह हमें मिलेगा, चुनाव आयोग पर दबाव बनाने जैसा है। जितेंद्र आव्हाड ने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी और चुनाव चिन्ह हमें मिलेगा, वह अजीत दादा के साथ गए लोगों द्वारा किया जा रहा है। हमने इस संदर्भ में चुनाव आयोग को लिखित शिकायत की थी। हमने कभी इस तरह का दावा नहीं किया। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र विभाग है। उस वक्त चुनाव आयोग ने दोनों दलों से साफ शब्दों में कहा था कि बहस के दौरान चुनाव आयोग को लेकर इस तरह की टिप्पणी न करें। इस संदर्भ में याचिका पर जल्द ही फैसला आने की उम्मीद है। इसके बाद भी अजीत दादा गुट की ओर से चुनाव चिन्ह को लेकर बयानबाजी की जा रही है। इसका मतलब चुनाव आयोग पर दबाव डालने जैसा है, ऐसा आव्हाड ने कहा।
राकांपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के इस्तीफे के समय की बात अजीत दादा बोल रहे थे, वे वैâसी भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे? वे लोगों पर वैâसे दबाव डाल रहे थे? यह सब जनता ने चैनल पर देखा है। अंत में आव्हाड ने तंज कसते हुए कहा कि वे बड़े आदमी हैं, कुछ भी कर सकते है। मुझे नहीं पता कि अजीत दादा को क्या दिक्कत है, उन्हें भी पता है कि वे किस दिक्कत की वजह से भाजपा में गए हैं। मैं दूसरे लोगों के मन की बात नहीं जान सकता, मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं, ऐसा भी आव्हाड ने कहा। वंचित बहुजन आघाड़ी को इंडिया में शामिल करने के लिए शीर्ष स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। इस संदर्भ में प्रकाश अंबेडकर से बात करने की जिम्मेदारी उद्धव ठाकरे को दी गई है, ऐसा जितेंद्र आव्हाड स्पष्ट शब्दों में कहा।

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