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आंखों की रोशनी छीन रही मोबाइल की लाइट! …अत्यधिक मोबाइल और टीवी की वजह से बच्चे हो रहे मायोपिया के शिकार

सामना संवाददाता / मुंबई
आज के इस डिजिटल दौर में सभी चीजें ऑनलाइन हो गई हैं। ऑनलाइन शॉपिंग के साथ कोरोना के दौर में ऑनलाइन स्टडी भी देखने को मिली, जहां बच्चों ने मोबाइल के सामने घंटों बैठकर पढ़ाई की। लेकिन अब मोबाइल और टीवी देखने का नतीजा यह हुआ है कि नौनिहालों की नजर कमजोर होती जा रही है और वे आंखों से संबंधित बीमारी मायोपिया के शिकार हो रहे हैं। अधिकतर बच्चे मोबाइल पर या तो गेम खेलते हैं या फिर अपनी पसंद के कार्टून देखते हुए हैं। लेकिन उनका यह अधिकतर प्रयोग बच्चों के लिए हानिकारक साबित हो रहा है। मोबाइल की लाइट बच्चों के आंखों की रोशन छीन रहा है।
बच्चों में दिख रही मायोपिया बीमारी
बच्चे मोबाइल जैसी छोटी स्क्रीन का बहुत नजदीक से प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें मायोपिया अपनी चपेट में ले रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि मायोपिया बच्चों में होने वाला निकट दृष्टि दोष है। इसमें बच्चे की आंखों की पुतली का आकार बढ़ने से प्रतिबिंब रेटिना के बजाय थोड़ा आगे बनता है। उन्हें दूर की चीज देखने में प्रॉब्लम होती है। कई रिसर्च में सामने आया है कि आंखों के लिए छोटी डिजिटल स्क्रीन बेहद खतरनाक है और जिन बच्चों के चश्मा लगा हुआ है, उनका नंबर बहुत तेजी से बढ़ रहा है।
मायोपिया के लक्षण
मायोपिया के लक्षण की बात करें तो इसमें बार-बार आंखों का झपकना, दूर की चीजें स्पष्ट न दिखना, देखने में परेशानी होना, सिर दर्द होना, सिर में दर्द रहना, पलकों को सिकोड़कर देखना, आंखों से पानी आना, क्लासरूम में ब्लैक बोर्ड या व्हाइट बोर्ड पर ठीक से न दिखना, किताबों के अक्षर स्पष्ट न दिखना शामिल है।
बच्चों का ऐसे रखें खयाल
जिस जगह बच्चे पढ़ रहे हैं, वहां प्रॉपर रोशनी हो। बच्चों को मोबाइल यूज करने के लिए कम से कम दें। यदि fिडजिटल स्क्रीन पढ़ाई के लिए देनी है तो मोबाइल की जगह लैपटॉप दें। बच्चे धूप लें, बच्चों को सूखा मेवा, पौष्टिक खाना, विटामिन ए युक्त डाइट जरूर दें।

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