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‘मोडानी है तो मुमकिन है’ … धारावी प्रोजेक्ट पर जयराम रमेश का तंज

सामना संवाददाता / मुंबई
महाराष्ट्र की धारावी परियोजना को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भाजपा के नेतृत्ववाली राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला और तंज कसते हुए कहा कि ‘मोडानी है तो मुमकिन है।’ उन्होंने आगे कहा कि महाराष्ट्र सरकार के पास इसके सिवाय कोई विकल्प नहीं बचा कि वह मुंबई की धारावी परियोजना अडाणी समूह को देने के अपने पैâसले का बचाव करे, क्योंकि उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेशों का पालन करने के साथ अपनी खामियों को भी ढंकना है।
महासचिव जयराम रमेश ने यह दावा भी किया कि मूल निविदा हासिल करनेवाली कंपनी को दरकिनार कर अडाणी समूह को यह परियोजना सौंपी गई है। उधर, महाराष्ट्र सरकार ने बंबई उच्च न्यायालय से कहा है कि मुंबई में धारावी झोपड़पट्टी पुनर्विकास परियोजना के लिए २०२२ में जारी की गई नई निविदा पूरी तरह पारदर्शी थी और सबसे ऊंची बोली लगानेवाले अडाणी समूह को इसमें किसी तरह का अनुचित लाभ नहीं दिया गया। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘प्रधानमंत्री के आदेशों को क्रियान्वित करने और धारावी झोपड़पट्टी पुनर्विकास परियोजना को उनके सबसे पसंदीदा कारोबारी को सौंपने के बाद, अडाणी समूह को एक मूल्यवान अचल संपत्ति का नियंत्रण लेने में मदद करने के लिए संदिग्ध पैâसले करने और खामियों का बचाव करने के अलावा महाराष्ट्र सरकार के पास कोई विकल्प नहीं बचा।’
फडणवीस पर किया कटाक्ष
कांग्रेस नेता ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर कटाक्ष करते हुए कहा, ‘आवास मंत्री के तौर पर अपने आखिरी दिन (पिछले दिनों मंत्रालय का प्रभार बदले जाने) पर देवेंद्र फडणवीस ने धारावी को अडानी को सौंप दिया। यह और बात है कि स्थायी ‘सीएम-इन-वेटिंग’ के लिए यह उपकार अभी तक भुगतान नहीं किया गया है।
दुबई की कंपनी ने जीती थी निविदा
रमेश ने दावा किया, ‘धारावी परियोजना की मूल निविदा, जिसे दुबई स्थित एक कंपनी ने ७,२०० करोड़ रुपए की बोली लगाकर जीता था, उसे रेलवे भूमि के हस्तांतरण से संबंधित मुद्दों के कारण २०२० में रद्द कर दिया गया था। लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार द्वारा जारी की गई नई (२०२२) निविदा की शर्तों को अडाणी की मदद करने के लिए तैयार किया गया था, जो मूल निविदा में दूसरे स्थान पर आया था।’
संपत्ति को दोगुना करने का था प्रावधान
रमेश ने कहा, ‘इसमें बोली लगानेवालों के लिए निर्धारित कुल संपत्ति को दोगुना कर २०,००० करोड़ रुपए करने का प्रावधान शामिल किया गया। विजेता को मूल रूप से निर्दिष्ट एकमुश्त भुगतान के बजाय किस्तों में भुगतान करने की अनुमति दी गई, जिससे नकदी संकट से जूझ रहे, अडाणी समूह को ५,०६९ करोड़ रुपए की बोली जीतने में मदद मिली यानी मूल विजेता बोली की तुलना में २,१३१ करोड़ रुपए कम बोली लगाई गई।’

थाली में सजाकर अडानी को सौंप दी गई रेलवे की जमीन
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘इतना ही नहीं, कम से कम एक हजार करोड़ रुपये की रेलवे की जमीन को सरकार द्वारा अधिग्रहित कर उसे थाली में सजाकर अडानी को सौंप दिया जा रहा है। इसके अलावा, रेलवे कर्मचारियों और झुग्गी-झोपड़ी में रहनेवालों के लिए सभी पुनर्वास लागत भी सरकार द्वारा वहन की जाएगी प्रधानमंत्री के सबसे करीबी दोस्त को दी गई ये असाधारण रियायतें ‘मोडानी है तो मुमकिन है’ का एक ज्वलंत उदाहरण है।’

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