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`पेगासस’ में मोदी सरकार ने नहीं दिया सहयोग! सुप्रीम कोर्ट में विशेष समिति की सनसनीखेज रिपोर्ट पेश

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
कल सुप्रीम कोर्ट ने ‘पेगासस’ जासूसी मामले की सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया। चीफ जस्टिस एन.वी. रमन्ना की बेंच में कल पेगासस जासूसी केस में सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट की बनाई हुई समिति ने बताया कि उसे इस मामले की जांच में मोदी सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। इसके साथ ही समिति ने यह भी कहा कि जासूसी के शक में उसे २९ फोन दिए गए थे, जिनमें से ५ फोन में मालवेयर मिला, लेकिन वो पेगासस था, ये कन्फर्म नहीं कहा जा सकता। चीफ जस्टिस ने कहा कि रिपोर्ट बड़ी है और इसे पढ़ने में वक्त लगेगा, इसलिए अगली सुनवाई सितंबर के आखिरी हफ्ते में होगी।
बता दें कि केंद्र सरकार ने २०१७ में एक इजराइली कंपनी से जासूसी सॉफ्टवेयर पेगासस खरीदा था। इस सॉफ्टवेयर को पांच साल पहले की गई २ अरब डॉलर (करीब १५ हजार करोड़ रुपए) की डिपेंâस डील में खरीदा गया था। इसी डिपेंâस डील में हिंदुस्थान ने एक मिसाइल सिस्टम और कुछ हथियार भी खरीदे थे। इस बात का खुलासा अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्वâ टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में किया था। जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने २७ अक्टूबर, २०२१ को एक एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था। सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आर.वी. रवींद्रन इसके अध्यक्ष बनाए गए थे। कमेटी गठित करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हर किसी की प्राइवेसी की रक्षा होनी चाहिए। कमेटी में अध्यक्ष जस्टिस रवींद्रन के साथ पूर्व आईपीएस अफसर आलोक जोशी और डॉक्टर संदीप ओबेरॉय शामिल हैं।

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