मुख्यपृष्ठनए समाचारघुसपैठियों को रोकने में मोदी सरकार हुई फेल

घुसपैठियों को रोकने में मोदी सरकार हुई फेल

सामना संवाददाता / मुंबई

सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता, आंकड़े जुटाने में असमर्थ केंद्र सरकार

पूर्वोत्तर राज्यों से देश में होनेवाली घुसपैठ को लेकर सही आंकड़े सुप्रीम कोर्ट को उपलब्ध कराने में केंद्र की मोदी सरकार पूरी तरह से फेल साबित हुई है। केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह आंकड़ा उपलब्ध करने में असमर्थता जताई है। इससे साफ हो रहा है कि यह सरकार हिंदुस्थान में सीमा प्रांतों से घुसपैठ रोकने में असफल साबित हो रही है। उल्लेखनीय है कि एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को देश में होनेवाली घुसपैठ को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को संबंधित आंकड़े पेश करने का निर्देश दिया था। और १९९५ के नागरिक कायदा के ६ ए नियम से जुड़े मामले पर निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि देश में अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है। नागरिकता कानून की धारा ६ए की वैधता पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह सवाल सरकार से किया है। चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने सरकार से पूछा है कि २५ मार्च १९७१ के बाद देश में अवैध घुसपैठ करने वालों की अनुमानित संख्या क्या है। कोर्ट ने पूछा है कि देश में खासतौर पर उत्तर पूर्वी राज्यों में अवैध घुसपैठ को रोकने के लिए सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए है? सरकार बांग्लादेश से लगती सीमा को सुरक्षित रखने के लिए क्या कर रही है? कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि २५ मार्च १९७१ के बाद िंहदुस्थान आनेवाले लोगों के लिए कितने फॉरेनर ट्रिब्यूनल केंद्र सरकार ने बनाए हैं, इन ट्रिब्यूनल ने अभी कितने केस का निपटारा किया है। अभी ट्रिब्यूनल के सामने कुल कितने केस पेंडिंग हैं। गुवाहाटी हाई कोर्ट के सामने कितने केस पेंडिंग है। कोर्ट ने सरकार से इन पहलुओं पर ११ जनवरी तक हलफनामा दाखिल कर जवाब देने को कहा है। चीफ जस्टिस ने कहा कि बांग्लादेश के साथ पश्चिम बंगाल की सीमा असम की सीमा से कई गुना बड़ी है तो फिर इस बात की उम्मीद ज्यादा है कि बांग्लादेश से बंगाल आनेवाले लोगों की संख्या असम के मुकाबले कहीं ज्यादा होगी।

घुसपैठियों ने बढ़ाया सेना का सिरदर्द

भारतीय सेना के लिए इस बार की सर्दियों में सीमा पर घुसपैठ को रोकने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। कारण, सीमांत पहाड़ों पर फिलहाल इतनी बर्फबारी नहीं हुई है, जितनी की उम्मीद की जा रही थी। यही कारण है कि घुसपैठियों के दल भीतर घुसने की कोशिशों को लगातार अंजाम दे रहे हैं।

हालांकि, इस साल कोई बड़ी बर्फबारी नहीं होने के कारण वे दर्रे अभी भी खुले हैं और रक्षाधिकारी कहते हैं कि प्रशिक्षित घुसपैठियों को इस ओर धकेलने के पाकी प्रयास अभी भी जारी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ समय के दौरान जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में आई यह वृद्धि सर्दियों की शुरुआत से पहले जम्मू कश्मीर को गर्म करने की बढ़ती पाकिस्तानी कोशिशों की ओर इशारा करती है, जब भारी बर्फबारी के कारण उच्च उत्तरी इलाकों में घुसपैठ मुश्किल हो जाती है। बता दें कि पिछले दो वर्षों में, नवंबर के पहले सप्ताह में बर्फबारी होती थी और एलओसी पर यह स्थिति सैनिकों को सहूलियत प्रदान करती थी। हालांकि, यह सच है कि हिंदुस्थान और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम समझौते के बाद शांति के दौर से गुजर रही एलओसी इस साल घुसपैठ की कुछ कोशिशों के बाद हाई अलर्ट पर है। रक्षाधिकारी कहते हैं कि एलओसी के पार लांच पैड पर कई आतंकी समूहों की मौजूदगी की खबरों के बीच खुफिया एजेंसियों ने ऐसे और प्रयासों की चेतावनी दी है।

कोर्ट को यह भी बताया

 १४,३४६ विदेशियों को २०१७ से २०२२ के बीच उनके देश वापस भेजा गया।
 १०० विदेशी ट्रिब्युनल असम में काम कर रहे हैं।
 ३.३४ लाख मामले ३१ अक्टूबर, २०२३ तक निस्तारित किए।
 ९७,७१४ मामले ३१ अक्टूबर तक विदेशी ट्रिब्युनल में लंंबित है।
 ८,४६१ मामले फॉरेन ट्रिब्युनल के आदेश से संबंधित गुवाहाटी हाई कोर्ट में लंबित हैं।

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