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गरीबों की मजदूरी भी दबाए बैठी है मोदी सरकार! …१८ राज्यों के मनरेगा मजदूरों का वेतन बकाया

• कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का सनसनीखेज खुलासा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद को गरीबों का मसीहा बोलते हैं। अपने आपको चाय बेचने वाला बोलकर गरीब जनता की वाह-वाही लूटने का कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। लेकिन सच्चाई तो यह है कि केंद्र की मोदी सरकार खुद ही गरीबों को लूट रही है। बता दें कि मोदी सरकार गरीबों की मजदूरी ६,३६६ करोड़ रुपए दबाकर बैठी है। ऐसा सनसनीखेज खुलासा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने किया है।
मिली जानकारी के मुताबिक मल्लिकार्जुन खड़गे ने १८ साल पहले कांग्रेस द्वारा शुरू किए गए प्रमुख ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम मनरेगा की सराहना की। इसके बाद उन्होंने कहा कि आज के दिन हमारी कांग्रेस-यूपीए सरकार ने करोड़ों लोगों को `काम का अधिकार’ सुनिश्चित करने के लिए मनरेगा लागू किया था। खड़गे ने दावा किया कि बजट में एक तिहाई कटौती के बाद भी मोदी सरकार पर अभी भी देश के १८ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मनरेगा मजदूरी का ६,३६६ करोड़ रुपए बकाया है।
महामारी में बनी जीवनरक्षक
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कोरोना महामारी के कारण जब लॉकडाउन लगा था, तब मनरेगा श्रमिकों के लिए जीवनरक्षक बना। मनरेगा ने महामारी के दौरान ८० प्रतिशत आय हानि की भरपाई की और लोगों को कठिन समय में अपनी आजीविका बनाए रखने में मदद करने में सकारात्मक भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह के नेतृत्व में मनरेगा पारित किया गया था।
ये हैै मनरेगा
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) २५ अगस्त २००५ को अधिनियमित भारतीय कानून है। मनरेगा वैधानिक न्यूनतम वेतन पर सार्वजनिक कार्य-संबंधी अकुशल शारीरिक कार्य करने के इच्छुक किसी भी ग्रामीण परिवार के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में सौ दिनों के रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करता है।

सरकार लगातार कर रही कटौती
खड़गे ने सोशल मीडिया पर कहा कि मोदी सरकार द्वारा इस साल मनरेगा के बजट में ३३ फीसदी की कटौती की गई है। साथ ही वर्तमान सरकार पर १८ राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों पर मनरेगा मजदूरी का ६,३६६ करोड़ रुपए बकाया है। कांग्रेस द्वारा शुरू की गई यह योजना करीब १४.४२ करोड़ मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण है। इनमें से आधे से अधिक महिलाएं हैं।

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