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मोदी सरकार जीत में मस्त, जनता मुद्रास्फीति से त्रस्त … अब ‘शहनाई’ पर महंगाई की मार!

• शादियों के सीजन में आम लोगों की क्रय शक्ति में गिरावट
•उपहार में उपकरण व सोने के गहने की जगह नकदी देने का प्रचलन बढ़ा

पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आ चुके हैं और तीन में जीत दर्ज कर मोदी सरकार जश्न में मस्त है। दूसरी तरफ जनता मुद्रास्फीति से त्रस्त है। शादियों का सीजन शुरू हो गया है। जानकारों के अनुसार, इस सीजन में ५० लाख से ज्यादा शादियों के होने का अनुमान है। अमीर-गरीब हर वर्ग अपनी हैसियत के अनुसार शादियों में खर्च करता है। शादी में एक बड़ा बजट गहने व नव दंपति को दिए जानेवाले टीवी-प्रâीज जैसे उपकरणों के लिए रखा जाता है। इसके अलावा शादी समारोहों का आयोजन भव्य स्तर पर किया जाता है। मगर इस बार महंगाई ने उत्तर हिंदुस्थान खासकर हिंदी भाषी क्षेत्रों में ट्रेंड बदल दिया है। लोग महंगे गहने व उपकरणों को उपहार में देने की बजाय नकद राशि देना पसंद कर रहे हैं। भव्यता से आयोजित होनेवाले शादी समारोहों में कटौती की जा रही है। ‘शहनाई’ में महंगाई की मार से बाजार में रौनक घट गई है। बाजार के जानकारों के अनुसार, लगातार बढ़ती महंगाई हिंदुस्थान के ग्रामीण और अर्ध-शहरी बाजारों, विशेष रूप से बड़े हिंदी पट्टी में शादी समारोहों को कम कर रही है। इससे सोने के गहने और घरेलू उपकरणों जैसी पारंपरिक शादी की वस्तुओं की मांग कम हो गई है। मुद्रास्फीति का दबाव घरेलू बजट को बाधित कर रहा है और निम्न से मध्यम स्तर की आय वाले लोगों की क्रय शक्ति पर उल्लेखनीय दबाव पड़ा है। छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कुल खपत पिछली छह से आठ तिमाहियों से प्रभावित हुई है, हालांकि इन बाजारों में संपन्न लोग खरीदारी जारी रख रहे हैं, वह भी प्रीमियम उत्पादों की। इस बीच शादी के उपहार के रूप में गहने और इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की जगह नकदी ले रही है। गोदरेज अप्लायंसेज के बिजनेस हेड कमल नंदी कहते हैं, ‘दिवाली के बाद उपकरणों की बिक्री २०२० के स्तर तक गिर गई है। शादी के मौसम के दौरान कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। लोग शादियों में उपकरण उपहार में देना बंद कर रहे हैं और इसके बजाय नकद दे रहे हैं। हमें उम्मीद थी कि इतनी सारी शादियों और ग्रामीण खर्च और शुरुआती उत्पादों में सुधार के कारण दिवाली के बाद भी बिक्री की गति जारी रहेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’ पारंपरिक तौर पर शादी के मौसम में हर साल दिवाली के बाद रेप्रिâजरेटर, वॉशिंग मशीन, टेलीविजन सेट और मिक्सर ग्राइंडर की बिक्री बढ़ जाती है, जो फरवरी तक जारी रहती है। इसी तरह ज्वैलर्स के लिए, धनतेरस और शादी के सीजन के कारण दिसंबर और मार्च तिमाही में उनकी वार्षिक बिक्री का लगभग ६० फीसदी उत्पन्न होता है। धनतेरस-दिवाली के बाद से सोने की कीमतें ५ फीसदी बढ़ी हैं और अब ६२,७२५ रुपए प्रति १० ग्राम पर हैं। ज्वैलर्स के अनुसार, झुमके और पेंडेंट जैसे छोटे सोने के आभूषण उपहारों की जगह नकदी ले रही है। नरम डॉलर और फेडरल रिजर्व की मौद्रिक सख्ती में ठहराव की उम्मीद से सोने की कीमतें बढ़ रही हैं। ऐशप्रा जेम्स एंड ज्वेल्स के निदेशक वैभव सराफ कहते हैं कि सोने की ऊंची कीमतों का मतलब होगा कि कम वजन बेचा जाएगा, लेकिन निवेश राशि वही रहेगी। हालांकि, कीमतों में वृद्धि के कारण, उपहार देने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अंगूठियां और बालियां जैसी छोटी वस्तुओं की बिक्री कम हो गई है। लोग अब चांदी के सिक्के या नकदी देना पसंद कर रहे हैं। सराफ की कंपनी उत्तर प्रदेश में गोरखपुर, देवरिया, बस्ती, आजमगढ़ और अयोध्या में ११ स्टोरों की शृंखला चलाती है। हिंदुस्थान की वार्षिक ६० फीसदी सोने की खपत ग्रामीण क्षेत्र में होती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने इसके इस साल ७००-७५० टन तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। जो पिछले साल की ७७४ टन की मांग से २४ टन कम है।

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