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मोदी सरकार के दावे हुए फेल, ३७० हटाने के बाद भी कश्मीर में जारी है खूनी खेल!

सुरेश एस डुग्गर / जम्मू

प्रदेश में १३४ मौतें, इनमें ३५ सुरक्षाकर्मी और ८५ आतंकी भी शामिल

बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आतंकवाद को समूलत: नष्ट करने को लेकर मोदी सरकार ने पिछले नौ सालों में कई दावे और वादे किए थे। लेकिन धीरे-धीरे उनके सभी वादे झूठे साबित हो रहे हैं। हाल ही में जम्मू-कश्मीर की घाटी में जो खूनी मंजर देखने को मिला उससे तो यही बात साबित होती है कि मोदी सरकार द्वारा किए गए वादे झूठे ही हैं। धारा ३७० हटाए जाने के साढ़े चार साल बाद भी कश्मीर रक्तरंजित है। वह शांति अभी भी दूर है, जिसके प्रति दावा किया गया था कि वह धारा ३७० के हटने के साथ ही लौट आएगी। पर ऐसा हुआ नहीं। प्रदेश में हिंसा का दौर अभी भी जारी है। इस साल अभी तक मारे गए ८५ आतंकियों, ३५ सुरक्षाकर्मियों और १४ नागरिकों की मौतें इसकी पुष्टि जरूर करती हैं।
गौरतलब है कि वर्ष २०२३ में जम्मू-कश्मीर में ९ मुठभेड़ों में २८ सैनिक मारे गए और नौ घायल हो गए। इस साल, जम्मू कश्मीर में कई मुठभेड़ हुर्इं, हालांकि, ९ मुठभेड़ों में कई सैनिकों को हताहत होना पड़ा, जिनमें जिनमें से ६ जम्मू डिवीजन में और ३ कश्मीर घाटी में हुर्इं। जम्मू संभाग में मुख्य रूप से पुंछ और राजौरी जिलों में कम से कम २५ सैनिक मारे गए, जबकि कश्मीर घाटी में तीन ऑपरेशन्स के दौरान ९ सैनिकों की जान चली गई।
नहीं थम रहा है बवाल
राजौरी के डीकेजी इलाके में आतंकी हमले में चार सैनिकों की शहादत के बाद घटनास्थल पर ही तीन नागरिकों के शव मिलने पर मचा विवाद अभी थमा नहीं है। इन तीन नागरिकों की मौत पर पहली बार सेना ने अपने तीन अधिकारियों को हटा दिया है।

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