मुख्यपृष्ठनए समाचारखतरे में मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया... रामभरोसे साइबर सुरक्षा!

खतरे में मोदी सरकार की डिजिटल इंडिया… रामभरोसे साइबर सुरक्षा!

– डेटा लीक और हैकिंग में हिंदुस्थान पहले नंबर पर

साइबर हमलों और साइबर सुरक्षा कानूनों तथा एक समर्पित मंत्रालय की मांग के बावजूद सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं है। अगर देश में साइबर सुरक्षा को सरकार मजबूत करती है तो इससे बड़ी संख्या में रोजगार उत्पन्न होगा।
हाल ही में डार्क वेब पर ८१ करोड़ हिंदुस्थानियों के डेटा लीक की खबर ने हर किसी को हैरान कर दिया। एक तरफ मोदी सरकार डिजिटल इंडिया का जाप कर रही है और दूसरी तरफ हैकर असके महत्वपूर्ण डेटा में सेंध लगा रहे हैं। इसका कारण है कि डिजिटल रूप से आगे बढ़ने वाली सरकार और दुनिया के सबसे बड़े आईटी-सक्षम सेवा क्षेत्रों के बावजूद हिंदुस्थान साइबर सुरक्षा के मामले में संघर्ष कर रहा है। साइबर हमलों और साइबर सुरक्षा कानूनों तथा एक समर्पित मंत्रालय की मांग के बावजूद सरकार इसके प्रति गंभीर नहीं है। अगर देश में साइबर सुरक्षा को सरकार मजबूत करती है तो इससे बड़ी संख्या में रोजगार उत्पन्न होगा।
एक हालिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि साल २०२१ से सितंबर २०२३ के बीच हिंदुस्थान के खिलाफ विदेशी सरकार-प्रायोजित साइबर हमलों में २७८ फीसदी की वृद्धि हुई है। इसमें सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग (बीपीओ) फर्मों सहित सेवा वंâपनियों में हमलों की हिस्सेदारी सबसे अधिक देखी गई है। इस अवधि के दौरान सरकारी एजेंसियों पर लक्षित साइबर हमलों में ४६० फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि स्टार्टअप और छोटे और मध्यम उद्यमों (एसएमई) पर ५०८ फीसदी की भारी वृद्धि देखी गई। हिंदुस्थान पर सबसे ज्यादा सरकार प्रायोजित साइबर हमले चीन की ओर से किए जा रहे हैं। सिंगापुर स्थित साइबर सुरक्षा फर्म साइफर्मा की ‘२०२३ इंडिया थ्रेट लैंडस्केप रिपोर्ट’ के अनुसार, हिंदुस्थान विश्व स्तर पर सबसे अधिक लक्षित देश है, जो सभी साइबर हमलों में से १३.७ फीसदी का सामना करता है।
९.६ फीसदी हमलों के साथ अमेरिका दूसरा सबसे अधिक लक्षित देश है। इसके बाद इंडोनेशिया और चीन ने क्रमश: ९.३ फीसदी और ४.५ फीसदी हमलों का सामना किया। साइफर्मा के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी कुमार रितेश के अनुसार, वैश्विक औसत की तुलना में हिंदुस्थान में विदेशी सरकार-प्रायोजित साइबर हमलों का अनुपात भी अधिक है। वैश्विक स्तर पर पिछले तीन वर्षों में लगभग ६८ प्रतिशत साइबर हमले सरकार प्रायोजित थे। साइफर्मा ने पाया कि आईटी और बीपीओ सहित सेवा कंपनियां मार्च २०२१ और सितंबर २०२३ के बीच १४.३ फीसदी साइबर हमलों का शिकार हुईं। इसके बाद विनिर्माण क्षेत्र पर ११.६ फीसदी और स्वास्थ्य देखभाल तथा शिक्षा में लगभग १०-१० फीसदी साइबर हमला देखा गया।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सहित खुदरा क्षेत्र में ९.८ फीसदी, जबकि सरकारी एजेंसियों पर ९.६ फीसदी हमले हुए। बैंकिंग और वित्तीय सेवा संस्थानों, ऑटोमोबाइल और एयरलाइंस पर क्रमश: ९.५ फीसदी, ८.३ फीसदी और ६.१ फीसदी हमले देखे गए। २०१५-१६ में हिंदुस्थान पर ५८-५९ फीसदी साइबर हमले पाकिस्तान या मध्य पूर्व के ऑपरेटरों से थे। आज केवल ६.४ फीसदी हमले पाकिस्तान या उनके सहयोगियों से हैं, जबकि ७९ फीसदी हमले चीन से हैं। जिस तरह के परिष्कृत साइबर अपराधियों के खिलाफ हिंदुस्थान मुकाबला कर रहा है, उसे देखते हुए उसे साइबर सुरक्षा नीतियों के बेहतर कार्यान्वयन और विशेष रूप से एसएमई और स्टार्टअप के बीच अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।
नहीं हैं सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम
जहां डिजिटलीकरण ने साइबर सुरक्षा की आवश्यकता को तेज कर दिया है, वहीं हिंदुस्थान के साइबर सुरक्षा नियम कमजोर और अपर्याप्त हैं। गत वर्ष २४ घंटे में ‘आईसीएमआर’ की वेबसाइट को हैक करने के करीब ६,००० प्रयास हुए थे। यह ‘एम्स’ के पांच सर्वरों को रैनसमवेयर द्वारा हैक किए जाने के एक सप्ताह बाद हुआ था। अनुमानित १.३ टेराबाइट डेटा एन्क्रिप्ट किया गया था। हैकर्स ने एम्स के लिए अपने ही डेटा तक पहुंच को असंभव बना दिया था। ३१ अक्टूबर २०२३ को बड़े पैमाने पर हुए एक डेटा उल्लंघन में आईसीएमआर के पास मौजूद ८१.५ करोड़ से अधिक हिंदुस्थानियों की जानकारी डार्क वेब पर बेच दी गई थी।

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