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आज से मानसून सत्र ‘ईडी’ सरकार की अग्निपरीक्षा! गैर-कानूनी सरकार के विरोध में महाविकास आघाड़ी आक्रामक

  • आम जनता और किसानों के मुद्दे को लेकर घेरने की रणनीति

सामना संवाददाता / मुंबई
राज्य विधानमंडल का मानसून सत्र आज से शुरू हो रहा है। इस सत्र के ‘ईडी’ यानी शिंदे-फडणवीस सरकार के लिए अग्निपरीक्षा साबित होने के आसार हैं। राज्य में बनी नई सरकार गैरकानूनी है, इसे बताते हुए महाविकास आघाड़ी ने आक्रामक रुख अख्तियार करने की योजना बनाई है। महिला अत्याचार, आम जनता के मसले, किसानों सहित सूबे के ज्वलंत मुद्दों को लेकर महाविकास आघाड़ी ने सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। एक तरफ विपक्ष के सवालों का जवाब देने की चुनौती तो दूसरी तरफ मंत्री पद न मिलने से नाराज विधायकों और मनमाफिक मंत्री पद न मिलने से नाराज मंत्रियों को संभालने का संकट शिंदे-फडणवीस सरकार के सामने होगा।
निर्धारित तारीख के करीब एक महीने विलंब से यह मानसून सत्र आयोजित होने जा रहा है। सुविधानुसार विधेयक, पूरक मांग मंजूर करने के लिए इस सत्र की कालावधि केवल छह दिनों की रखी गई है। कालावधि कम है लेकिन शिंदे-फडणवीस सरकार के लिए यह सत्र चुनौती भरा साबित होने के संकेत मिल रहे हैं। २० जून से शुरू हुआ सत्ता संघर्ष अभी भी खत्म नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले की तलवार इस सरकार पर लटक रही है। मुख्यमंत्री-उपमुख्यमंत्री की शपथ के ३९ दिनों बाद मंत्रिमंडल का विस्तार किया गया। लेकिन विभागों की पर्याप्त जानकारी न होने से मंत्रियों का सिरदर्द बढ़ सकता है। चर्चा है कि इसीलिए छह दिन के कामकाज के एजेंडे में जनहित से जुड़ी ध्यानाकर्षण सूचना और प्रश्नकाल जैसी अहम कार्यवाही शामिल नहीं है।
फैसले स्थगित करने को लेकर विपक्ष आक्रामक
शिवसेना के अधिकृत सदस्यों को विधानमंडल कामकाज सलाहकार समिति में नियुक्त करने, महाविकास आघाड़ी सरकार के निर्णयों को स्थगित करने, किसान प्रोत्साहन अनुदान, महिला अत्याचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने का निर्णय महाविकास आघाड़ी की बैठक में लिया गया है। बीते २० जून से सरकारी कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। सुस्त कामकाज का झटका सत्र में सरकार को लग सकता है। विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों का उचित जवाब देने के लिए प्रशासन स्तर की तैयारी ऐन मौके पर विफल होने की प्रबल संभावना है।
ये विधेयक होंगे सदन में पेश
महाविकास आघाड़ी सरकार के फैसले  को बदलकर नई सरकार ने सरपंचों और नगराध्यक्षों का चयन सीधे जनता के माध्यम से करने का निर्णय लिया है। इसके तहत ग्राम पंचायत, नगरपालिका अधिनियम में संशोधन करने के लिए विधेयक लाया जाएगा। इसी तरह निकाय संस्थाओं और मनपा चुनाव, २०१७ की प्रभाग रचना के अनुसार कराने का निर्णय इस सरकार ने लिया है। इस संबंध में विधेयक सदन में पेश किया जाएगा। सरकार की ओर से पूरक मांग पेश की जाएगी, उसकी मंजूरी के लिए विनियोजन विधेयक भी इस सत्र में पेश किया जाएगा।

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