रमजान का महीना

रब से तो जोड़ता है रमजान का महीना
जुड़ते हो तो जुड़ते रहो बाकी ग्यारह महीना
इबादत करो तुम हरदम खुदा की
सुबहो शाम
जब तक पता चले ना अल्ला
ईश्वर है नाम
कौन जगह खाली और है
कही ना
रब से तो जोड़ता है रमजान का
महीना
उसका कनेक्शन है तो हाथ मैं
हिलाऊं
मर्जी हो उसी की तभी मैं गीत
गाऊं
भूलना ना उसको रिटर्न टिकट
दीना
रब से जोड़ता है रमजान का
महीना
आये हो तुम वहां से उसके ही
पास जाना
वैâसे रहे जमीं पे ये हाल है
बताना
प्यार रहे दिल में रहो हंसी
खुशी ना
रब से तो जोड़ता है रमजान का
महीना
खुदा के बंदे हम सब बंदों से
करना प्यार
नेक नसीहत है कुरान का है
सार
बंदे हम खुदा के बदनाम हो
कही ना
रब से तो जोड़ता है रमजान का
महीना
इंसान बन के आया इंसान
बन के जीना
रहम करो सभी पे रहमान बनके
जीना
धरती बनेगी जन्नत तेरा घर बने
मदीना
रब से तो जोड़ता है रमजान का
महीना
–श्रीनाथ शर्मा

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