चंद्र खिलौना

चंद्र खिलौना पाने की,
श्रीकृष्ण ने जब बाल हठ की,
मां यशौदा ने मनाने की,
कोशिशें अपनी तमाम कीं।
माखन के लालच की मां यशौदा की,
कोशिश भी कान्हा ने फौरन नाकाम की।
आंगन में लोट-पोट की,
मैय्या की नाक में दम की।
थाली में चांद की,
छवि दिखलाने की।
तरकीब आखिरकार काम की।
माखन न छूने की जिद की,
कन्हैया ने अपनी कसम की,
अंत में घोषणा की।
श्रीकृष्ण की ऐसी कथाएं,
मनमोहक अनंत लीलाएं।
आज तक अजर-अमर हैं,
‘कृष्ण-भक्ति’ की सच्ची डगर है।

– इं. पंकज गुप्ता, मुंबई

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