मुख्यपृष्ठनए समाचारदिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के लिए चढ़ेगी २१ हजार से अधिक पेड़ों की बलि

दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के लिए चढ़ेगी २१ हजार से अधिक पेड़ों की बलि

दीपक शर्मा

भारत के विकास की दौड़ में वन क्षेत्रों में पेड़ों की बलि चलन में है, जबकि विश्वव्यापी जलवायु परिवर्तन और इसके चलते बनती विनाशकारी स्थिति से इतर पेड़ों को काटा जाना बदस्तूर जारी है। सरकार इसका कोई समुचित उपाय ढूंढ़ने की बजाय पेड़ों को काटे जाने के बाद नए पेड़ रोपित करने की बात कर महज खानापूर्ति भर करने तक सीमित है। इसी विकास की कड़ी में २१ हजार से अधिक पेड़ों की बलि देने की बात उजागर हुई है, जिसमें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने कहा है कि दिल्ली-कटरा एक्सप्रेसवे के लिए जम्मू, रियासी वन क्षेत्र और वन्यजीव प्रभागों में २१,००० से अधिक पेड़ काटे जाएंगे।
जम्मू निवासी आरटीआई कार्यकर्ता रमन शर्मा द्वारा सूचना का अधिकार याचिका के जवाब में एनएचएआई ने बताया है कि जम्मू-कटरा एक्सप्रेसवे के लिए जम्मू शहर के बाहरी क्षेत्र कुंजवानी से सिद्धड़ा और सिद्धड़ा से नगरोटा स्थित बन टोल प्लाजा खंड के बीच कुल २१,४८३ पेड़ काटे जाने हैं। एनएचएआई के जवाब से पता चलता है कि कुंजवानी से सिद्धड़ा खंड के लिए जम्मू वन प्रभाग के तहत ११,९४६ पेड़, सिद्धड़ा से बन टोल प्लाजा खंड के लिए १,७८१ पेड़ काटे जाएंगे, जिनमें से ७४६ पेड़ जम्मू वन्यजीव प्रभाग के अंतर्गत आते हैं।
वन प्रभाग रियासी के अधिकार क्षेत्र के तहत दोमेल और कटरा खंड के बीच ७,७५६ पेड़ों को काटे जाने की जरूरत बताई गई है। आरटीआई के जवाब में यह भी बताया गया है कि अब तक काटे जाने के लिए निर्धारित २१,४८३ पेड़ों में से ८,१५० पहले ही काटे जा चुके हैं, जिनमें से ७,००० कुंजवानी से सिद्धड़ा खंड (जम्मू वन प्रभाग) के बीच और १,१५० सिद्धड़ा से बन टोल प्लाजा के बीच काटे गए हैं। नगरोटा, दोमेल से कटरा सेक्शन के बीच अभी तक कोई पेड़ नहीं काटा जा रहा है।
दस्तावेजों के अनुसार, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, पीआईयू उधमपुर ने यह भी खुलासा किया है कि जम्मू और रियासी वन प्रभागों से संबंधित ७१६ कनाल (३६.२५११ हेक्टेयर) से अधिक वन भूमि को गैर-वानिकी उद्देश्यों के लिए डायवर्ट किया जाएगा, जिसका उपयोग जम्मू-कटरा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए किया जाएगा। आरटीआई से पता चलता है कि वन भूमि से काटे गए पेड़ों के लिए प्रतिपूरक वनीकरण का भी प्रावधान है, जिसके लिए धन उपयोगकर्ता एजेंसी द्वारा प्रदान किया जाएगा।

(लेखक पत्रकार एवं स्तंभकार हैं।)

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