मुख्यपृष्ठखबरेंआधी से अधिक हिंदुस्थान की नारी एनीमिया से पीड़ित!

आधी से अधिक हिंदुस्थान की नारी एनीमिया से पीड़ित!

सामना संवाददाता / मुंबई

भारतीय महिलाओं में समय के साथ कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता हुआ देखा गया है, एनीमिया का खतरा उनमें से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताते हुए कहा कि हिंदुस्थान की आधी से अधिक महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं। साल २०१५-२०१६ में भारतीय महिलाओं में एनीमिया का प्रसार ५४ फीसदी था, जो २०१९-२०२० में बढ़कर ५९ फीसदी हो गया। चिंताजनक बात यह है कि ज्यादातर महिलाओं को इस बात का पता भी नहीं है कि वो एनीमिया की शिकार हैं।
बता दें कि एनीमिया शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं की संख्या या हीमोग्लोबिन (एचबी) कम होने की स्थिति को कहा जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हिंदुस्थान में १५-४९ वर्ष की आयु की ५७ फीसदी महिलाओं और छह महीने से ५९ महीने के बीच के ६७ फीसदी बच्चों में इस गंभीर स्वास्थ्य समस्या का खतरा देखा जा रहा है। इसके लक्षणों की समय रहते पहचान और उपचार जरूरी है वरना एनीमिया गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण बन सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि किशोरों में एनीमिया की समस्या विकासात्मक विकारों का भी कारण बन सकती है। ऐसे लोगों के लिए काम पर फोकस कर पाना कठिन हो जाता है। कम उम्र में शारीरिक समस्याओं के कारण दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम भी हो सकता है।
इसके कारण होने वाली समस्या
हीमोग्लोबिन, लाल रक्त कोशिकाओं में मौजूद एक आवश्यक प्रोटीन है, जो शरीर के अन्य हिस्सों में ऑक्सीजन ले जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि जिन लोगों को एनीमिया होता है उनका रक्त शरीर में पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचा पाता है। ऑक्सीजन की कमी होने का स्थिति में अल्पकालिक और दीर्घकालिक तौर पर कई प्रकार की दिक्कतों का जोखिम बढ़ जाता है। इस स्थिति में सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई, हृदय गति तेज होने और त्वचा के नीला पड़ने का भी खतरा रहता है। वहीं लंबे समय तक बनी रहनी वाली एनीमिया की स्थिति कई तरह की स्वास्थ्य जटिलताओं और क्रोनिक रोगों के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है।

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