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चीन में तोड़ी जा रही हैं मस्जिदें!

मनमोहन सिंह
‘जब मैंने मस्जिद के गुंबद को टूटते देखा, तो मेरा दिल दर्द से कराह उठा… ऐसा महसूस हुआ जैसे मेरे घर को जबरन उजाड़ दिया है और आप बस देखते रह सकते हैं… यह हमारे धर्म का विनाश है।’ चीन के दक्षिण-पश्चिम प्रांत युन्नान में नाजियायिंग मस्जिद जो अब अपनी मस्जिद की पहचान खो बैठा है, उसे याद करते हुए कहते हैं ‘चिंग’। चिंग उनका असली नाम नहीं है लेकिन वे चीनी प्रशासन से इतने डरे हुए हैं कि चीन में हो रहे इस्लाम के दमन के खिलाफ एक भी शब्द खुलकर नहीं कहना चाहते हैं। उन्हें याद है कि चीन की पुलिस ने उस मस्जिद के ‘नवीनीकरण’ के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे मुसलमानों को किस बर्बरता से ‘हैंडल’ किया था।
अंतरराष्ट्रीय संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की एक रिपोर्ट के मुताबिक चीन मस्जिदों को बंद कर रहा है, तोड़ रहा है या उनके उपयोग बदल रहा है। उनका मानना है कि ये नतीजा है बीजिंग के चीन में इस्लाम के पालन को रोकने के ‘व्यवस्थित प्रयास’ का।
हालांकि, चीन हमेशा से ही इस बात का दावा करता रहा है कि वहां धार्मिक स्वतंत्रता है, भले ही वह आधिकारिक रूप से नास्तिक देश है। लेकिन चीन के करीब दो करोड़ मुसलमान इस्लाम के खिलाफ बढ़ रही बीजिंग की अमानवीयता से बुरी तरह से डरे हुए हैं। कई मुसलमानों को डर है कि मस्जिदों को खत्म करने या उनमें बदलाव लाने से उनकी धार्मिक स्वतंत्रता भी खत्म हो जाएगी।
चिंग कहते हैं, ‘मसला मस्जिदों के गुंबद हटाने का नहीं है। वे सभी मुसलमानों को हान बनाना चाहते हैं, इस्लाम को जीवन से हटाना चाहते हैं। प्रार्थना बंद करने के लिए धार्मिक अध्ययन बंद करें। हमारी संस्कृति, हमारे जीने के तरीके को बदलने के लिए।’
ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी में चीन में इस्लाम की इतिहासकार हन्ना थेकर के अनुसार मस्जिद के गुंबदों को गिराना चीनीकरण की नीति का सबसे स्पष्ट पहलू है, जो पार्टी और धर्म के बीच संबंधों को पूर्ण पैमाने पर पुनर्वितरित करने का लक्ष्य रखता है।
चीन मस्जिदों में बदलाव उन क्षेत्रों में सबसे अधिक करवा रहा है, जहां पारंपरिक रूप से इस्लाम का पालन करनेवालों की आबादी सबसे अधिक है। निंग्जिया के पश्चिमी क्षेत्र में उपग्रह विश्लेषण से पता चलता है कि इस्लामी वास्तुकला वाली ९० फीसद से अधिक मस्जिदों की विशेषताएं हटा दी गई हैं। उत्तर-पश्चिमी प्रांत गांसु में यह आंकड़ा ८० प्रतिशत से अधिक है। बीजिंग का तर्क है कि शिनजियांग में उसकी नीतियां आतंकवाद से लड़ने, एकता बनाने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक हैं। मस्जिदों में बदलाव उनको आधुनिक बनाने और उन्हें चीनी संस्कृति के साथ ‘सामंजस्य’ बनाने के लिए है। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों का मानना है कि हाल के सालों में संगठित धर्म का दमन बढ़ा है और चीन धर्म पर अपना नियंत्रण बढ़ा रहा है।

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