मुख्यपृष्ठनए समाचारमच्छरों का डंक और आपका ब्लड ग्रुप

मच्छरों का डंक और आपका ब्लड ग्रुप

मनमोहन सिंह

१९३० में जापानी प्रोफेसर टोकेजी फुरुकावा ने जर्नल ऑफ सोशल साइकोलॉजी में ‘ए स्टडी ऑफ टेम्परामेंट एंड ब्लड-ग्रुप्स’ नामक एक रिपोर्ट प्रकाशित की। टोकेजी का तर्क था कि ब्लड ग्रुप के आधार पर व्यक्तित्व, स्वभाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसे नाम दिया गया केत्सुकी-गाटा। हालांकि, यह वैज्ञानिक सिद्धांतों के तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं है फिर भी जापान, कोरिया जैसे एशियाई देशों में इसका प्रचलन है।

७० के दशक के बाद १९८४-८५ में भी इस विषय पर लोगों ने काम किया। भले ही लोगों ने इस तर्क पर ज्यादा विश्वास नहीं किया कि ब्लड ग्रुप से व्यक्तित्व का पता लगाया जा सकता है लेकिन ब्लड ग्रुप से कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं इसको लेकर शोध होते रहे हैं।

अमेरिका में ब्लड ग्रुप को व्यक्तित्व से उतना नहीं जोड़ा गया जितना कि इसे विशिष्ट बीमारियों से जोड़ा गया है। उदाहरण के लिए, टाइप ‘ए’ ब्लड ग्रुप के व्यक्तियों में पेट के वैंâसर और हृदय रोग का खतरा ज्यादा पाया गया है। टाइप ‘बी’ ब्लड ग्रुप के लोगों में हृदय रोग और डिंबग्रंथि के वैंâसर का खतरा अधिक होता है, ‘एबी’ ब्लड ग्रुप के व्यक्तियों में हृदय रोग और गर्भवती महिलाओं में प्रीक्लेम्पसिया विकसित होने का खतरा ज्यादा होता है और टाइप ‘ओ’ ब्लड ग्रुप के व्यक्तियों में अल्सर विकसित होने, मच्छरों को आकर्षित करने और अकिलीज टेंडन की चोटें होने की संभावना अधिक होती है।

आपने एकदम सही पढ़ा कि टाइप ‘ओ’ ब्लड ग्रुप के व्यक्तियों में मच्छरों को आकर्षित करने की संभावना अधिक होती है। वैज्ञानिकों ने बहुत सारे शोध किए हैं और पता लगया है कि मच्छर किन-किन वजहों से आपको दूसरों की तुलना में ज्यादा काटते हैं।

जापानी वैज्ञानिकों के अनुसार ‘ओ’ ब्लड ग्रुप वालों को मच्छर ज्यादा काटते हैं, जबकि ‘ए’ ब्लड ग्रुप के लोगों को मच्छर कम काटते हैं। वहीं ‘बी’ ब्लड ग्रुप वालों को मच्छर सामान्य रूप से काटते हैं।

इंसान के शरीर से निकलने वाली कार्बन डाईऑक्साइड की गंध भी मच्छरों को तेजी से आकर्षित करती हैं। मादा मच्छर अपने ‘सेंसिंग ऑर्गेन्स’ से इसकी गंध पहचान लेती है। मच्छर १५० फीट की दूरी से भी इसकी गंध को आसानी से पहचान सकते हैं।

गर्भवती स्त्रियों को भी मच्छर ज्यादा काटते हैं। इसकी वजह अन्य स्त्रियों की तुलना में वे ज्यादा गहरी सांसें लेती हैं। गर्भवती स्त्रियों के शरीर का टेंपरेचर भी अधिक होता है।

इसके अलावा इंसान के रंग उनके कपड़ों के रंग और पसीने की गंध से भी मच्छर आकर्षित होते हैं। मजेदार बात यह है कि मच्छरों को बियर भी पसंद है। यह मजाक नहीं है। सच मानिए, अगर आप बीयर पीयेंगे तो मच्छर आपको ज्यादा काटेंगे। इसकी साफ वजह है कि इथेनॉल की गंध मच्छरों को बहुत ज्यादा प्यारी है और बीयर पीने से शरीर में इथेनॉल की मात्रा बढ़ जाती है। अब आप ही बताइए कि जब उसे बियर की गंध से है प्यार तो डंक मारने से वो भला कैसे कर सकता है अपने आपको इनकार!

अन्य समाचार