मुख्यपृष्ठनए समाचारमुख्यमंत्री के ठाणे में सबसे ज्यादा छात्र अनुपस्थित

मुख्यमंत्री के ठाणे में सबसे ज्यादा छात्र अनुपस्थित

सामना संवाददाता / नई मुंबई
हर साल की तरह इस बार भी शिक्षा विभाग स्कूल न जानेवाले बच्चों के आंकड़ों को जमा करने के काम पर लग गए हैं। अप्रैल माह में शुरू किए गए इस सर्वेक्षण में महाराष्ट्र के लगभग आठ हजार से अधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि मुख्यमंत्री के ठाणे में सर्वाधिक बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। इन बच्चों की संख्या १,४०० के करीब है, वहीं मुंबई और मुंबई उपनगर में यह आंकड़े क्रमश: ४९१ और ६५२ क्रमश; हैं।
प्राथमिक शिक्षा संचालनालय के इस सर्वेक्षण का उद्देश्य ऐसे बच्चों को फिर से स्कूल तक वापस लाना है, जो अनियमितता, स्थानांतरण और अन्य वजहों के चलते स्कूल से ड्रॉपआउट होते शिक्षा के अधिकार के तहत ५ से १४ साल के हर बच्चे को शिक्षित करने की जिम्मेदारी सरकार के इस महकमे की है। मिशन जीरो ड्रॉप आउट के तहत ग्राम पंचायत नगरपालिका, महानगरपालिका के जन्म-मृत्यु कागजातों के आधार पर परिवारों का सर्वेक्षण किया जाता है। साथ ही स्थानीय स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और गांव, कस्बों शहरों से स्थानांतरित हुए बच्चों की जानकारी जुटाई जाती है। फिलहाल, यह सर्वेक्षण अगस्त के अंत तक जारी रहेगी। इस बीच जारी आंकड़े बताते हैं कि सबसे अधिक बच्चे ठाणे और सबसे कम बच्चे लातूर से ड्रॉपआउट हुए हैं।
मुंबई शहर ४९१, मुंबई उपनगर ६५२, ठाणे १,४०१, जलगांव ४०१, नासिक ३८०, नगर ११३, अकोला ३४०, अमरावती १९८, छत्रपति संभाजी नगर ८००, बीड १५३, पुणे ८१७, बुलढाणा ६४, चंद्रपुर १३, धुले ४७२, गढ़चिरौली ३५, गोंदिया ८०, हिंगोली ७८, कोल्हापुर ६९, जालना १००, लातूर ११, नागपुर ११०, नांदेड़ १९, नंदुरबार २४९, धाराशिव २५, पालघर ३०९, परभणी १२१, रायगड १७४, रत्नागिरी ४५, सांगली ९१, सातारा ४०, सिंधुदुर्ग ४५, सोलापुर ६७, वर्धा ३४, वासिम ४८ और यवतमाल ८१।
बता दें कि हाल ही में राज्य विधान मंडल में पेश की गई एक सरकारी रिपोर्ट में पाया गया कि पिछले तीन सालों में राज्य के माध्यमिक स्कूलों में भी ड्रॉपआउट दर बढ़ रही है। ड्रॉपआउट दर २०२०-२१ में ४.६ फीसदी रही। २०१९-२० में ६.४ प्रतिशत से बढ़कर २०२१-२२ में १०.७ प्रतिशत हो गई।

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