मुख्यपृष्ठनए समाचारब्रह्मचर्य की प्रतिमूर्ति मां ब्रह्मचारिणी!... कुंडलिनी शक्ति जागृत करें मंत्रों का जाप

ब्रह्मचर्य की प्रतिमूर्ति मां ब्रह्मचारिणी!… कुंडलिनी शक्ति जागृत करें मंत्रों का जाप

ब्रह्मचर्य रूपी तपस्या का आचरण करने के कारण मां भगवती को ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया है। मां दुर्गा का यह शांति पूर्ण स्वरूप है। शास्त्रों में वर्णित ब्रह्मचारिणी का रूप पूर्ण ज्योतिर्मय एवं अत्यंत भव्य है। मां के दाहिने हाथ में जप की माला है और बाएं हाथ में कमंडल है। वो पूर्ण उत्साह से भरी हुई हैं। नवरात्र पर्व के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्‍यता के अनुसार मां दुर्गा का ब्रह्मचारिणी स्वरूप हिमालय और मैना की पुत्री हैं, जिन्‍होंने भगवान नारद के कहने पर भगवान शंकर की कठिन तपस्‍या करने के बाद भगवान शिव की पत्‍नी बनीं।
पौराणिक कथा
पार्वती हिमवान की बेटी थींr। एक दिन वो अपनी सखियों के साथ खेल में व्यस्त थीं उसी दौरान नारद मुनि आए और भविष्यवाणी किए कि तुम्हारी शादी भोलेनाथ से होगी और उन्होंने उसे सती की कहानी भी सुनाई। नारद मुनि ने उनसे यह भी कहा उन्हें भोलेनाथ के लिए कठोर तपस्या भी करनी पड़ेगी। इसके बाद मां पार्वती ने अपनी मां से कहा कि वो भोलेनाथ से ही शादी करेंगी अन्यथा अविवाहित रहेंगी। यह बात बोलकर वो जंगल में तपस्या करने के लिए चली गर्इं। इसी वजह से उन्हें तपश्चारिणी या ब्रह्मचारिणी कहा जाता है।
पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य पंडित अतुल शास्त्री ने बताया कि नवरात्रि में शिव-पार्वती का एक चित्र अपने पूजास्थल में रखें और उनकी पूजा-अर्चना करने के पश्चात मंत्र का ३, ५ या १० माला जाप करें। जाप के बाद भगवान शिव से विवाह में आ रहीं बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करें-
मंत्र- ऊं शं शंकराय सकल-जन्मार्जित-पाप-विध्वंसनाय,
पुरुषार्थ-चतुष्टय- लाभाय च पतिं मे देहि कुरु कुरु स्वाहा।।
पंचामृत का भोग लगाएं
मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाया जाता है। इन चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य मिलता है। मां ब्रह्मचारिणी को पीला रंग अत्यंत प्रिय है। अत: नवरात्रि के दूसरे दिन पीले रंग के वस्त्रादि का प्रयोग कर मां की आराधना करना शुभ होता है। मान्‍यता है कि माता ब्रह्मचारिणी की पूजा और साधना करने से कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। यदि आप भी अपनी कुंडलिनी शक्ति जागृत करना चाहते हैं तो नवरात्रि में निम्नलिखित मंत्रों का जाप करें।
या देवी सर्वभूतेषु ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।।
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलुं।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

ज्योतिषाचार्य पं. अतुल शास्त्री
ज्योतिष सेवा केंद्र

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