मुख्यपृष्ठधर्म विशेषनाड़ी दोष को नष्ट करती हैं मां कात्यायनी!

नाड़ी दोष को नष्ट करती हैं मां कात्यायनी!

नवरात्र मां आदिशक्ति की आराधना सहित विशेष कार्यसिद्धि का भी विशेष पर्व है। इस दौरान कुछ लाभकारी अनुष्ठानों के जरिए इंसान अपने जीवन में खुशियां ला सकते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि विवाह नहीं हो रहा है या वैवाहिक जीवन में सुख नहीं होना। वैवाहिक जीवन में समस्या के कई कारण हो सकते हैं, जैसे कुंडली का न मिलना, ग्रह गोचर की खराब दशा में विवाह होना, शनि साढ़े साती या नाड़ी दोष होना क्लेश का कारण हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में यदि स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं तो ‘मां कात्यायनी का अनुष्ठान’ बहुत लाभकारी होता है। मां दुर्गा का छठा रूप है कात्यायनी। एक बार एक महान संत जिनका नाम कात्यायन था, जो अपने समय में बहुत प्रसिद्ध थे, उन्होंने देवी मां की कृपा प्राप्त करने के लिए लंबे समय तक तपस्या की। उन्होंने एक देवी के रूप में एक बेटी की आशा व्यक्त की थी। उनकी इच्छा के अनुसार मां ने उनकी इच्छा को पूरा किया और मां कात्यायनी का जन्म उनके घर हुआ।
ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री मां कात्यायनी
मां दुर्गा के छठे स्वरूप का नाम कात्यायनी है और नवरात्र के छठवें दिन इन्हीं मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की जाती है। पुराणों के अनुसार कात्यायन ऋषि के यहां जन्म लेने के कारण माता के इस स्वरूप का नाम कात्यायनी पड़ा। मां कात्यायनी का यह स्वरूप अत्यंत चमकीला और भव्य है। इनकी चार भुजाएं हैं। मां का दाहिनी तरफ का ऊपरवाला हाथ अभयमुद्रा में तथा नीचे वाला वरमुद्रा में है। बार्इं तरफ के ऊपरवाले हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में कमल-पुष्प सुशोभित है। इनका वाहन सिंह है। मां शत्रुओं का नाश करनेवाली हैं, इसलिए इनकी पूजा करने से शत्रु पराजित होते हैं और जीवन सुखमय बनता है। मान्यता यह भी है कि मां कात्यायनी की पूजा करने से कुंवारी कन्याओं का विवाह जल्द हो जाता है। भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाने के लिए ब्रज की गोपियों ने कालिंदी यानी यमुना के तट पर मां कात्‍यायनी की ही आराधना की थीं। अत: मां कात्यायनी ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी के रूप में भी जानी जाती हैं।
रोग, शोक, संताप, भय से मुक्ति
माता कात्यायनी की उपासना से आज्ञा चक्र जागृति की सिद्धियां साधक को स्वयंमेव प्राप्त हो जाती हैं। वह इस लोक में रहकर भी अलौलिक तेज और प्रभाव से युक्त हो जाता है तथा उसके रोग, शोक, संताप, भय आदि सर्वथा नष्ट हो जाते हैं। मां कात्यायनी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है। इस दिन प्रसाद में मधु यानी शहद का प्रयोग करना चाहिए। इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है। मां कात्यायनी को सफेद रंग अत्यंत प्रिय है, जो शांति का प्रतीक है। अत: इस दिन विशेष रूप से सफेद रंग का प्रयोग करना शुभ प्रभाव देता है। बुध ग्रह की शांति तथा अर्थ में वृद्धि के लिए कात्यायनी देवी की पूजा करें।
मां दुर्गा के कात्‍यायनी रूप की उपासना करने के लिए निम्‍न मंत्र की साधना करनी चाहिए-
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कात्‍यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

ज्योतिषाचार्य पं. अतुल शास्त्री
ज्योतिष सेवा केंद्र, मुंबई

अन्य समाचार