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ममता का फर्ज! 81 साल की मां ने बेटे को किडनी देकर बचाई जान

सामना संवददाता / मुंबई । किसी भी युग में मां की ममता को कोई नहीं आंक सका है। मां आयु के किसी भी पड़ाव में हो वह अपने बच्चों के लिए मरने-मिटने के लिए तैयार रहती है। इसका ताजा उदाहरण हाल में सामने आया है। करीब 81 साल की बुजुर्ग मां ने अपनी एक किडनी देकर मौत के मुहाने पर खड़े अपने 54 वर्षीय बेटे को संजीवनी दी है। मां की इस गाथा की चहुंओर प्रशंसा हो रही है। एक जानकारी के अनुसार देश में हर साल करीब दो लाख लोग किडनी विकार के शिकार हो रहे हैं।

देश की सबसे बुजुर्ग जीवनदाता बनीं वृद्धा
अपने 54 वर्षीय बेटे को एक किडनी दान कर कला शशिकांत शाह हिंदुस्थान की पहली सबसे बुजुर्ग जीवनदाता बन गई हैं। अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों ने बताया कि यह एक मिसमैच्ड ब्लड ग्रुप ट्रांसप्लांट मामला था। सर्जरी के बाद दाता और प्राप्तकर्ता दोनों की तबियत पूरी तरह से ठीक हो गई है। सबसे रोचक बात यह रही कि 81 वर्षीय कला शाह के स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं हुआ।

रोबोटिक यूरोलॉजिस्ट और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ अमोलकुमार पाटील ने कहा कि सर्जिकल प्रौद्योगिकी का लगातार अपग्रेडेशन किया जा रहा है। आज के दौर में कम से कम इन्वेसिव टेक्निक्स सबसे ज्यादा अपनाए जा रहे हैं। इससे सर्जरी के बाद के दर्द को बेहतर तरीके से नियंत्रण में रखा जा सकता है। साथ ही मरीज की तबियत जल्द से जल्द ठीक होती है। इतना ही नहीं शरीर पर सर्जरी के निशान भी नहीं रहते।

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