मुख्यपृष्ठधर्म विशेषजीवन दर्पण : मोती से मिलती है चंद्रमा को मजबूती!

जीवन दर्पण : मोती से मिलती है चंद्रमा को मजबूती!

डाॅ. बालकृष्ण मिश्र

गुरु जी, मेरी कुंडली में दोष क्या है और मुझे नौकरी कब मिलेगी?
– मनमोहन दुबे
(जन्मतिथि- ९ सितंबर १९९७, समय- रात्रि २.५० बजे, स्थान -जौनपुर, उ.प्र.)
मनमोहन जी, आपका जन्म अनुराधा नक्षत्र के द्वितीय चरण में हुआ है। राशि आपकी वृश्चिक है। यदि आपके करियर के बारे में हम बात करेंगे तो कर्क लग्न में आपका जन्म हुआ है। कर्क लग्न का स्वामी चंद्रमा होता है। वह चंद्रमा आपकी कुंडली में नीच राशि का है और पंचम भाव पर बैठा है। इस कारण थोड़ा-सा विलंब लग रहा है। चंद्रमा को ताकत देने के लिए आपको मोती धारण करना जरूरी होगा, निश्चित सफलता मिलेगी क्योंकि दशम भाव का स्वामी मंगल है। मंगल चौथे स्थान पर बैठकर अपनी पूर्ण दृष्टि से देख रहा है। आपकी कुंडली में कालसर्प योग भी बन रहा है। विस्तार से जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाना चाहिए।

गुरु जी, मेरी राशि क्या है और मेरी कुंडली में दोष क्या है, कृपया मुझे बताएं? – माधवी तिवारी
(जन्मतिथि- २४ अप्रैल २००२, समय- प्रात: ५.२५ बजे, स्थान- कल्याण, ठाणे)
माधवी जी, आपका जन्म पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है। आपकी राशि सिंह बन रही है। यदि लग्न के आधार पर हम विचार करें तो मीन लग्न में आपका जन्म हुआ है और मीन लग्न का स्वामी बृहस्पति होता है। बृहस्पति चौथे स्थान पर बैठा हुआ है। चौथे स्थान पर बैठकर अपनी पूर्ण दृष्टि से दशम भाव को देख रहा है। आपके जन्म के बाद में पिता का विकास भी हुआ होगा और सूर्य ग्रह आपकी कुंडली में उच्च राशि का है। यदि महादशा के आधार पर हम बात करें तो मंगल की महादशा में बृहस्पति का अंतर चल रहा है। समय अनुकूल चल रहा है लेकिन चंद्रमा ग्रह आपकी कुंडली में पंचम भाव का स्वामी है। इस कारण आपका मन स्थिर नहीं है। मंगल ग्रह के साथ में राहु पराक्रम भाव पर बैठकर अंगारक योग भी बनाए हुए है। इसकी वैदिक विधि से पूजा भी होना जरूरी है। विशेष जानकारी के लिए संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाएं।

गुरु जी, मेरी कोई भी इच्छापूर्ति नहीं हो पाती है, क्या वजह है? – महेंद्र सिंह
(जन्मतिथि- २७ फरवरी १९५६, समय- रात्रि १०.३६ बजे, स्थान- सायन, मुंबई)
महेंद्र जी, आपका जन्म उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के तृतीय चरण में है। आपकी राशि कन्या बन रही है। यदि लग्न के आधार पर हम बात करें तो तुला लग्न में आपका जन्म हुआ है। तुला लग्न का स्वामी शुक्र होता है। लग्न का स्वामी शुक्र उच्च राशि का है लेकिन छठे भाव पर बैठकर अपनी नीच की दृष्टि से बारहवें भाव को देख रहा है। इस भाव से इच्छापूर्ति का विचार किया जाता है। आपकी कुंडली को अगर हम गहराई से देखें तो द्वितीय भाव पर राहु के साथ में शनि बैठा हुआ है। शनि आपकी कुंडली में पंचम भाव का स्वामी होकर द्वितीय भाव पर बैठा हुआ है और दशम भाव का स्वामी बारहवें भाव में बैठा हुआ है, जिस कारण आप अपनी शिक्षा एवं काबिलियत का पूरी तरह से बेनिफिट नहीं प्राप्त कर पा रहे हैं। क्योंकि आपका जीवन संघर्ष में है लेकिन संघर्ष के बाद आपको बेनिफिट मिलेगा। महादशा के आधार पर अगर हम बात करें तो शनि की महादशा में मंगल का अंतर चल रहा है। मंगल आपकी कुंडली में द्वितीय एवं सप्तम भाव का स्वामी है। सप्तम एवं द्वितीय भाव का स्वामी होकर पराक्रम भाव पर बैठकर आपको उत्साहित कर रहा है। लेकिन उसकी दशम की दृष्टि दशम भाव पर नीच की पड़ रही है। इस कारण यदि आप उपाय करेंगे तो आपको बेनिफिट मिलना प्रारंभ हो जाएगा। मंगल का उपाय करना आपके लिए बहुत ही आवश्यक है। विशेष जानकारी के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण बनवाना चाहिए।
गुरु जी, हमारी परेशानी कब तक दूर होगी, कृपया कोई उपाय बताएं? – सचिन मिश्र
(जन्मतिथि- ६ मार्च १९८०, समय- ४.५५ बजे, स्थान- उल्हासनगर, ठाणे)
सचिन जी, आपका जन्म चित्रा नक्षत्र के चतुर्थ चरण में हुआ है। राशि आपकी तुला है। राशि के आधार पर अगर हम बात करें तो आपकी राशि पर शनि की ढैया भी चल रही है, जो १७ जनवरी, २०२३ को समाप्त हो जाएगी। यदि फ्यूचर के बारे में हम बात करें तो मकर लग्न में आपका जन्म हुआ है। मकर लग्न का स्वामी शनि है। वह शनि आपकी कुंडली में भाग्य भाव पर बैठा हुआ है। वो भाग्यशाली तो बनाया हुआ है लेकिन इस समय शनि की ढैया चल रही है। अत: शनि का उपाय करना होगा। शनि का उपाय करेंगे तो आपका काम अनुकूल होने लगेगा। प्रतिदिन आपको हनुमान चालीसा का ३ बार पाठ करना चाहिए और पीपल के पेड़ की परिक्रमा भी करनी चाहिए। जीवन की गहराइयों को जानने के लिए आपको संपूर्ण जीवन दर्पण भी बनवाना चाहिए।

ग्रह-नक्षत्रों के आधार पर आपको देंगे सलाह। बताएंगे परेशानियों का हल और आसान उपाय। अपने प्रश्नों का ज्योतिषीय उत्तर जानने के लिए आपका अपना नाम, जन्म तारीख, जन्म समय, जन्म स्थान मोबाइल नं. ९२२२०४१००१ पर एसएमएस करें। उत्तर पढ़ें हर रविवार…!

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