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एमपी का ‘कांटा’ भी कटेगा! : वसुंधरा के बाद ‘मामा’ की बारी खतरे में शिवराज का ताज! …अमित शाह ने दिए संकेत

मध्य प्रदेश में इसी साल विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं और इस बार वहां भाजपा की नैया डोल रही है। दूसरी तरफ तीन बार के सीएम शिवराज सिंह चौहान का कद भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को कांटे की तरह चुभ रहा है। पड़ोसी प्रदेश राजस्थान में हाल ही में वसुंधरा राजे की कटिंग करते हुए विधानसभा चुनाव के लिए बनाई गर्इं दोनों प्रमुख समितियों से बाहर कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि इसके बाद अब ‘मामा’ की बारी है। अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसके संकेत भी दे दिए हैं।
गौरतलब है कि कुछ हालिया सर्वे के अनुसार भाजपा के लिए इस बार एमपी में पार पाना मुश्किल है। २०१८ की तरह ही कांग्रेस ने बढ़त बना रखी है और शायद इसीलिए शिवराज सिंह चौहान टेंशन में हैं। रही सही कसर अमित शाह ने यह कहकर पूरी कर दी है कि एमपी में मुख्यमंत्री का चेहरा बदला जा सकता है। दरअसल, अमित शाह ने मुख्यमंत्री के चेहरा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। रविवार को अमित शाह ने शिवराज को बड़ा झटका देते हुए कहा कि शिवराज सिंह अभी मुख्यमंत्री हैं, लेकिन चुनाव के बाद कौन होगा, इस बारे में पार्टी तय करेगी। शाह के इस बयान को इस बात का संकेत माना जा रहा है कि अगर भाजपा जीतती भी है तो भी शिवराज सीएम नहीं बनेंगे। राजस्थान के बाद एमपी के इस घटनाक्रम से यह समझा जा रहा है कि भाजपा को न तो शिवराज पर भरोसा है और न ही वसुंधरा पर। जहां तक एमपी का सवाल है तो वहां पार्टी के भीतर उठापटक का आलम है। इसका खामियाजा भी भाजपा को चुनाव में भुगतना पड़ सकता है। शिवराज पार्टी को एक रख पाने में विफल रहे हैं। इसकी शिकायत ऊपर तक पहुंची है।
रविवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में अमित शाह ने शिवराज सरकार का रिपोर्ट कार्ड जारी किया तो उनकी बॉडी लैंग्वेज बता रही थी कि वे शिवराज से बहुत खुश नहीं हैं। इस दौरान भाजपा को बहुमत मिलने पर अगला मुख्यमंत्री कौन होगा, इस सवाल पर अमित शाह ने साफ कहा कि शिवराज सिंह चौहान अभी मुख्यमंत्री हैं, विधानसभा चुनाव के बाद क्या करना है, किसे जिम्‍मेदारी देनी है, इसके बारे में पार्टी को तय करना है। उन्होंने पत्रकारों की तरफ इशारा करते हुए कहा, ‘पार्टी का काम पार्टी को करने दीजिए, आप मत कीजिए।’

सर्वे ने किए होश फाख्ता
हाल ही में एक टीवी चैनल ने सर्वे किया था। इसकी रिपोर्ट भाजपा की परेशानी बढ़ाने वाली है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर है। दोनों दलों के बीच सीटों का अंतर बहुत ज्यादा नहीं है। इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर राज्य में एक बार फिर से २०१८ वाले हालात बन सकते हैं। २०१८ के चुनाव में कांग्रेस को ११४ जबकि भाजपा को १०९ सीटें मिली थी।

अमित शाह ने साफ कहा कि शिवराज सिंह चौहान अभी मुख्यमंत्री हैं, विधानसभा चुनाव के बाद क्या करना है, किसे जिम्‍मेदारी देनी है, इसके बारे में पार्टी को तय करना है!’- अमित शाह

विजयवर्गीय ने भी दिए संकेत
भाजपा के भीतर कितना घमासान है इसका संकेत वैâलाश विजयवर्गीय ने भी दिया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर हम संगठन की गलतियां ठीक नहीं करते हैं तो भाजपा खुद अपनी हार का कारण बन सकती है। असल में वहां प्रदेश के कुछ बड़े नेता अब खुलकर पार्टी और कुछ नेताओं की आलोचना करने लगे हैं। ऐसे में प्रदेश में यदि भाजपा की नैया डूब जाए तो इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

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