" /> `तो इंटिमेट सीन कर सकती हूं!’- मृणाल ठाकुर

`तो इंटिमेट सीन कर सकती हूं!’- मृणाल ठाकुर

धारावाहिक `कुमकुम भाग्य विधाता’ से अपनी एक खास पहचान बनाने के बाद अभिनेत्री मृणाल ठाकुर ने फिल्मों में कदम रखा। महाराष्ट्र स्थित धुले जिले की रहनेवाली मृणाल ठाकुर की `लव सोनिया’, `सुपर ३०’, `बाटला हाउस’ जैसी फिल्में रिलीज हुर्इं। अभिनय क्षेत्र में आने के बाद मृणाल ठाकुर कई दिलचस्प प्रोजेक्ट्स में व्यस्त हैं। पेश है मृणाल ठाकुर से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-

वर्ष २०२० आपके लिए  कैसा रहा?
ये वर्ष मेरे लिए थोड़ी खुशी और थोड़ा गम देनेवाला था। कोरोना काल ने सभी को दुखी कर दिया। कोरोना में जहां अनगिनत लोगों की नौकरी चली गई, वहीं इसने हमसे कई लोगों को छीन लिया। दूसरी ओर हम सभी आत्मनिर्भर हो गए। कोरोना और लॉकडाउन ने हमें अच्छी तरह समझा दिया कि हमारी बेसिक जरूरतें क्या हैं।
क्या आप बचपन में खेल से जुड़ी रहीं?
हां, मैं एक खिलाड़ी हूं। मैंने बास्केटबॉल जिला स्तर पर और फुटबॉल भी खेला है।
अभिनय में आने की प्रेरणा कैसे मिली?
परिवार में कोई भी फिल्म इंडस्ट्री से नहीं था। जब भी मैं कोई फिल्म देखती थी, तो हैंगओवर हो जाता था और इससे निकलने में एक सप्ताह लगता था। मैंने फिल्म ‘थ्री इडियट्स’ देखी और उससे मुझे पता चला कि आप वही काम करें, जो आपको पसंद है। यह फिल्म मेरे जीवन की टर्निंग पॉइंट बनी।
आपको अपने परिवार का कितना सहयोग मिला?
माता-पिता ने पहले तो मना कर दिया। उनके हिसाब से मुझे एक सुरक्षित जॉब करनी चाहिए क्योंकि फिल्म आज है कल नहीं। मुझे जब सीरियल का ऑफर मिला, तो मैंने उन्हें बुलाकर शूटिंग से संबंधित सारी चीजें दिखाई। जब उन्हें मेरे काम के बारे में पता चला फिर उन्होंने कभी मना नहीं किया। मैं एक साधारण परिवार से हूं और बहुत हिम्मत कर इस क्षेत्र में कदम रखा है। मेरे लिए फिल्मों की दुनिया बहुत अलग है।
क्या आउटसाइडर होने पर इंडस्ट्री में अच्छा काम मिलना मुश्किल होता है?
मुझे कभी भेदभाव महसूस नहीं हुआ क्योंकि मैं खुद को आउटसाइडर नहीं, बल्कि इंडस्ट्री का ही हिस्सा समझती हूं। मेरी जर्नी बहुत अच्छी रही है। मेरे हिसाब से अगर आपमें काबिलियत है और आप खुद पर विश्वास रखते हैं, तो कोई भी चीज आपको हासिल करने में मुश्किल नहीं होगी।
किस शो ने आपकी जिंदगी बदली?
धारावाहिक ‘कुमकुम भाग्य’ से मेरी जिंदगी बदली। इस शो से मैंने बहुत कुछ सीखा। लोग कहते हैं कि फिल्में करनी है तो टीवी में काम नहीं करना चाहिए लेकिन मेरा लर्निंग प्रोसेस टीवी ही है। मेरे हिसाब से नए कलाकार को टीवी में काम अवश्य करना चाहिए क्योंकि वो इससे बहुत कुछ सीख सकता है।
क्या कभी रिजेक्शन का सामना करना पड़ा?
बहुत बार करना पड़ा। मैंने उस समय अपने पेरैंट्स से बात की, जिससे सब नॉर्मल हो गया। असल में हम सब को जीत की खुशी का पता होता है लेकिन हार को कैसे लेना है यह सिखाया नहीं जाता। मैं चाहती हूं कि स्कूल में ऐसे पाठ्यक्रम को शामिल किया जाए, ताकि बच्चे किसी भी हालत में तनावग्रस्त न हों।
अभी ज्यादातर फिल्में थिएटर की बजाय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हो रही हैं, आपकी इस बारे में क्या राय है?
ओटीटी छोटी और कम बजट की फिल्मों के लिए एक अच्छा प्लेटफॉर्म है, परंतु मेरी फिल्में थिएटर में ही रिलीज होनेवाली हैं, ताकि दर्शक फिल्म का आनंद ले सकें। मेरी दोनों ही फिल्में खेल पर आधारित लव स्टोरी हैं, पर मेरी भूमिका दोनों में अलग है। दर्शकों को भी इन्हें देखने में मजा आएगा।
आप फिल्म में इंटिमेट सीन करने में कितनी सहज है?
मैं जब स्क्रिप्ट पढ़ती हूं तो देखती हूं कि इसमें अंतरंग दृश्य जरूरी है या नहीं। जरूरत है तो इंटिमेट सीन कर सकती हूं लेकिन बिना जरूरत के बिल्कुल भी नहीं।