मुख्यपृष्ठसमाचारमुख्तार के भाई अफजाल का  यूपी सरकार पर हमला...अफसरों पर साजिश रचने...

मुख्तार के भाई अफजाल का  यूपी सरकार पर हमला…अफसरों पर साजिश रचने का लगाया आरोप

•’माफिया बृजेश सिंह के साथ मिलकर यूपी के अफसर रच रहे मुख्तार के खिलाफ बड़ी साजिश ‘

विक्रम सिंह / सुल्तानपुर । मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सांसद अफजाल अंसारी ने सोमवार को यूपी सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि मुख्तार अंसारी एमपी/एमएलए कोर्ट की अमानत हैं। कोर्ट ने जेल प्रशासन को उनकी सुपुर्दगी ही नहीं, सुरक्षा का जिम्मा भी दिया है। मुख्तार पर दर्ज मुकदमों के ट्रायल, माफिया डॉन बृजेश सिंह के खिलाफ उनकी गवाही, बदले की भावना से कार्रवाई और माहौल बिगाड़ने में सरकारी अमला जुटा है। मुख्तार अंसारी को बांदा जेल से लखनऊ ले जाकर पेशी कराने को लेकर अफजाल ने आरोप लगाया कि अफसरों के साथ मिलकर पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह साजिश रच रहे हैं।
अफजाल ने बांदा जेल से लखनऊ ले जाने की प्रक्रिया को न्यायिक व्यवस्था और कानून का अनुपालन बताया तो सरकार पर तमाम सवाल भी खड़े किए। कहा कि मामले को सनसनीखेज बनाने के साथ अनहोनी की आशंकाओं को बढ़ावा भी मिल रहा है। उन्होंने
कहा कि मुख्तार को खरोंच आना भी लोकतंत्र और न्यायिक व्यवस्था पर सवाल और कानून से खिलवाड़ है। उन्होंने यूपी सरकार के कुछ अधिकारियों पर पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी को क्षति पहुंचाने की बात भी कही। सांसद ने कहा कि हम भारत के लोकतंत्र और न्यायपालिका में पूरा भरोसा रखते हैं। कोर्ट में किसी मामले की पेशी पर आपत्ति नहीं है लेकिन ये तरीके आशंकाओं को जन्म देते हैं। न्यायालयों में वीडियो कांप्रâेसिंग के जरिए हर दिन तमाम पेशी हो रही है।

एफटीसी की तरह हर दिन हो सुनवाई
सांसद अफजाल अंसारी ने कहा कि जिन मामलों में मुख्तार गवाह हैं, उनमें तो गवाही की तारीख ही नहीं लग पा रही है। कोर्ट में चल रहे मुकदमों की एफटीसी की तरह जल्द सुनवाई होनी चाहिए। कहा, मुख्तार को हर मामले में षड्यंत्र के तहत फंसाया गया और अब तक किसी मामले में सजा तक नहीं हुई। यही बात न्यायपालिका पर उनका भरोसा मजबूत करती है।

दादी की विरासत से अब्बास और उमर को मिली संपत्ति
लखनऊ में अवैध कब्जे और शत्रु संपत्ति हथियाने के मामले में मुख्तार की पेशी हुई। लखनऊ के मौजा जियामऊ में इस जमीन को मुख्तार अंसारी की मां राबिया बेगम ने १९६२ में मोहम्मद वसीम से खरीदा था। बाद में वह पाकिस्तान चले गए। आराजी संख्या ९३ में दर्ज पांच बीघा भूमि की वसीयत राबिया ने अपने पोते अब्बास और उमर को कर दी। भूखंड पर दो टावर में फ्लैट बना दिए गए। बाद में २९ दिसंबर २०१८ को राबिया बेगम के इंतकाल के बाद संपत्ति अब्बास अंसारी और उमर अंसारी के नाम चढ़ गई। इसके बाद जांच में एलडीए को नक्शे और प्रक्रिया में खामियां मिली और भवनों का ध्वस्त करा दिया गया।

अन्य समाचार