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वित्तीय दिवालियेपन की दिशा में मुंबई और महाराष्ट्र! …. आदित्य ठाकरे की बड़ी चेतावनी

सड़क के ठेकेदारों पर श्वेत पत्रिका की आवश्यकता
सामना संवाददाता / मुंबई
विगत २५ वर्षों में शिवसेना ने मुंबई मनपा के पैसे का इस्तेमाल संभालकर किया। लेकिन ईडी सरकार के ठेकेदारों और बिल्डरों पर मनपा के पैसे को लुटाया जा रहा है। घाटे का बजट पेश कर ठाणे, नागपुर, नासिक की तरह मुंबई मनपा की वित्तीय स्थिति खराब करने और दिल्ली के दरवाजे के बाहर मुंबई मनपा को भीख का कटोरा लेकर बैठाने की कोशिश की जा रही है। पिछले छह महीनों में मुंबई और राज्य में कानूनी और नैतिक दिवालियापन चल रहा था। लेकिन अब हम वित्तीय दिवालियेपन की ओर बढ़ रहे हैं, ऐसी चेतावनी शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता, विधायक और युवासेनाप्रमुख आदित्य ठाकरे ने कल दी।
मुंबई मनपा के बजट की पृष्ठभूमि पर आदित्य ठाकरे ने शिवसेना भवन में मीडिया से संवाद साधा। इस मौके पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता सांसद संजय राऊत और विधायक रवींद्र वायकर भी उपस्थित थे।

हमारी पहली जीत
केंद्रीय बजट पर हम जिस तरह नजर रखे हुए थे, उसी तरह हम मनपा के बजट पर भी नजर रखे थे। केंद्रीय बजट से गुजरात और कर्नाटक को मिला, लेकिन महाराष्ट्र, मुंबई को कुछ भी नहीं मिला है। मनपा के बजट पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने आगे कहा कि मनपा ने बजट पर नागरिकों से सुझाव मांगे थे, वो कहीं नहीं दिखा। उसे क्यों मंगाया था? उसकी कहीं कोई भी जानकारी नहीं दिख रही। लेकिन मुंबई के नागरिक के रूप में मैंने सुझाव दिया था कि नई परियोजना की घोषणा नहीं की जानी चाहिए, वो असंवैधानिक होगी। इस साल के बजट में किसी बड़े प्रोजेक्ट को शामिल नहीं किया गया है, यह हमारी पहली जीत है। लेकिन जो भी छोटी और बड़ी परियोजनाओं की घोषणा की गई, उस पर भी हम अध्ययन कर रहे हैं। साथ ही जो भी कानूनी कार्रवाई आवश्यक होगी हम करेंगे, क्योंकि लोकतंत्र में एक अधिकारी ने राजनीतिक लोगों अथवा जनप्रतिनिधियों की भूमिका न लेकर प्रशासक के रूप में कार्य करते हुए मनपा आयुक्त खुद को जनप्रतिनिधि, महापौर अथवा नागरिक न समझें। क्योंकि सारे अधिकार नगरसेवकों और स्थायी समिति के अध्यक्ष का होता है, ऐसा उन्होंने कहा।

हमारे कार्यकाल की परियोजनाएं
बजट में परियोजनाओं पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि नई परियोजना की घोषणा नहीं की गई है। लेकिन आस्थापना व्यय के लिए प्रावधान किया जाए, ऐसी मांग मैंने की थी। कोस्टल रोड, हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे हमारा अस्पताल जैसी कई परियोजनाएं हमारी थीं। हमारे समय की हैं, इस ओर आदित्य ठाकरे ने ध्यान आकृष्ट किया। पिछले बजट और वर्तमान बजट को देखें तो ८० फीसदी काम कॉपी पेस्ट किया गया है। भाषा वही है, लेकिन नाम बदला है।

वर्षा पर छपा ठेकेदारों का बजट
बजट पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि ५० हजार करोड़ रुपए के पेश किए गए बजट को देखें तो सवाल खड़े होते हैं। अब वास्तव में बजट खर्च कहां बढ़ा है? कोई नई परियोजना नहीं है तो खर्च कहां बढ़ा, ऐसे सवाल लोगों के मन में पैदा हो चुके हैं। इसलिए तो क्या यह बजट ठेकेदारों की मदद के लिए पेश किया गया है?

ढाई से साढ़े छह हजार करोड़ सड़क के लिए
मनपा के पहले बजट की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों से सड़कों का बजट दो से ढाई हजार करोड़ रुपए का होता था। उसे इस बार साढ़े छह हजार करोड़ पर लेकर चले गए। लेकिन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने ऐसे ही कहीं भी इसकी घोषणा कर डाली। लेकिन बीते अगस्त में पांच हजार करोड़ के टेंडर थे, उसे बढ़ाकर जनवरी में साढ़े छह करोड़ रुपए कर दिया और इसमें आश्चर्य की बात यह है कि केवल पांच ठेकेदारों को मतलब हर एक को एक पैकेट और औसत ४८ प्रतिशत की वृद्धि मिली थी। इसमें ६ हजार ८० करोड़ रुपए दिखाए गए, तो आखिर मनपा वास्तव में किसे ठग रही है? इस पर एक श्वेत पत्र प्रकाशित करने की आवश्यकता है।

सौंदर्यीकरण पर १,७०० करोड़
सौंदर्यीकरण पर किए गए प्रावधान की ओर उंगली उठाते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि १,७०० करोड़ रुपए सौंदर्यीकरण पर हैं। ये पिछले नगरसेवकों के फंड से घुमाया गया था। यह मनपा आयुक्त का अधिकार है क्या? मूलरूप से जिस स्थायी समिति और आम सभा ने मंजूर किया है, वो पैसे मनपा आयुक्त खुद ही घुमा सकते हैं क्या? यह लोगों को जानने की जरूरत है।

स्काईवॉक पर अपव्यय
बजट में स्काईवॉक पर ७५ करोड़ रुपए की राशि के बारे में पढ़कर झटका लगा, ऐसा कहते हुए उन्होंने कहा कि महाविकास आघाड़ी के कार्यकाल में स्काईवॉक कहीं नहीं होना चाहिए, ऐसा हमने कहा था, क्योंकि स्काईवॉक अच्छे नहीं दिखते। जिन स्थानों पर बहुत जरूरी हो, उसी स्थान पर ही लगाए जाने चाहिए। ७५ हजार करोड़ रुपए खर्च कर स्काईवॉक कहां बनाएंगे, ऐसा सवाल उन्होंने किया।

आयुक्त द्वारा प्रस्तुत एवं अनुमोदित
इन सभी प्रस्तावों को मनपा आयुक्त एक हाथ से प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं दूसरे हाथ से आयुक्त इस प्रस्ताव को अनुमोदित भी कर रहे हैं। इससे पहले मनपा आयुक्त द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करते, फिर स्थायी समिति में चर्चा, नगरसेवकों की स्वीकृति, आम सभा और विभिन्न समितियों में बजट की स्वीकृति का चलन था, लेकिन इस स्थान पर बजट प्रस्तुत करनेवाले मनपा आयुक्त और मंजूर करनेवाले भी मनपा आयुक्त हैं। लोकतंत्र में यह कितना उचित है। मुंबई में लोकतंत्र है या नहीं, ऐसा सवाल उन्होंने किया।

पैसों का उपयोग सोच-समझकर करने की जरूरत
बजट में फिजूलखर्ची की बात करते हुए उन्होंने कहा कि मनपा आयुक्त के भाषण की स्क्रिप्ट देखें तो यह मुख्यमंत्री के वर्षा बंगले से छपकर आई है। लेकिन इस बजट में उल्लेख किया गया है कि मुंबई शहर की लंबाई और चौड़ाई बढ़ रही है। इसलिए आवश्यक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता है। लेकिन महानगरपालिका के पास आय की वित्तीय सीमा है। इसलिए इन्हें आय के नए स्रोत खोजने की जरूरत है और खर्चों पर पाबंदी लगाने की जरूरत है। ऐसा खुद कमिश्नर ने अपने भाषण में कहा है। उनके इस कथन पर आदित्य ठाकरे ने ध्यान केंद्रित किया।

अंत में मुंबईकरों पर दोष
मनपा आयुक्त के बजट भाषण पर आगे टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि एक तरफ फिजूलखर्ची है और दूसरी तरफ खर्च कम किया जा रहा है। उसका कारण यह है कि मनपा की आय कम हो गई है। इसलिए मनपा आयुक्त ने खुद भाषण में कहा कि खर्च को कम करने की जरूरत है, वहीं दूसरी ओर महानगरपालिका की संपत्ति कर में कमी हुई है। इसलिए घाटा दिखाया गया है। ५०० वर्गफुट के घरों को संपत्ति कर में छूट दिए जाने का कारण बताया गया है, लेकिन संपत्ति कर माफ करने का शिवसेना का वचन था और वचनपूर्ति की गई थी। उद्धव ठाकरे जब मुख्यमंत्री हुए, तब ५०० वर्गफुट के घरों का संपत्ति कर माफ किया गया था।

मुंबई के स्वाभिमान को कर रहे समाप्त
यह सब क्यों हो रहा है, इस तरह का सवाल करते हुए उन्होंने आगे कहा कि मुंबई के बजट को देखा जाएगा तो मुंबई के स्वाभिमान को ठेस पहुंचेगी। उन्होंने खेद व्यक्त किया कि मुंबई को दिल्ली के सामने झुकाना और फिर ठाणे, नागपुर, नासिक महानगरपालिकाओं की तरह घाटे का बजट पेश करना और हर बार मुंबई को राज्य सरकार या केंद्र सरकार के दरवाजे पर बैठाना और मुंबई को पैसा देने के लिए कहना मतलब मुंबई के स्वाभिमान को समाप्त करने का काम शुरू है। इस तरह का खेद व्यक्त किया।

एफडी पर श्वेत पत्र की आवश्यकता
मनपा की जमा एफडी और बैंक निधि के संबंध में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मनपा की जमा एफडी से कितनी राशि का उपयोग किया जा रहा है, इसका उपयोग वैâसे किया जा रहा है, इस पर पालिका एक श्वेत पत्र जारी करे। लेकिन कुछ लोग यह चर्चा कर रहे हैं कि मनपा की एफडी बैंक में पड़ी है, उसका उपयोग शहर के विकास के लिए नहीं किया जाता। ८८ हजार करोड़ रुपए रखे हैं, उसका इस्तेमाल वैâसे किया जाता है? यह वर्षों से बजट में दिख रहा है। लेकिन पैसे कैसे इस्तेमाल किए जाते हैं, यह कुछ लोग हमें सिखाने जाते हैं। वे याद रखें कि १९९७ में जब मुंबई मनपा सत्ता में आई थी, तब घाटे का बजट था लेकिन तब से शिवसेना के नगरसेवकों और स्थायी समिति के अध्यक्षों ने योजना और मेहनत से मुंबईकरों का पैसा बचाया है और वह पैसा कैसे इस्तेमाल किया जाता है, वह बजट में दिखाया है।

उद्धव ठाकरे का सपना हुआ पूरा
मुंबई मनपा के कोस्टल रोड के संदर्भ में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पालिका कोस्टल रोड का निर्माण कर रही है। इसमें कहीं भी टोल बढ़ाए बिना कोस्टल रोड का काम जल्द ही पूरा होने जा रहा है और यह पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे का सपना पूरा होने जैसा होगा। क्‍योंकि इस एफडी में पैसे की बचत की है। एसटीपी प्रोजेक्ट, गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड जैसे कई प्रोजेक्ट्स के लिए मुंबईकरों पर बिना कोई टैक्स लगाए यह काम कर रहे हैं, वहीं एमएसआरडी की सड़कों पर चार टोल लगाए गए हैं। इसलिए जो भी खर्च और फिजूलखर्ची चल रही है, उस पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग आदित्य ठाकरे ने की।

एयर प्यूरिफायर पूरी तरह फर्जी
फर्जी एयर प्यूरीफायर को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ये टावर बेहद फर्जी हैं। जब मैं पर्यावरण मंत्री था, तब मुझसे संपर्क किया गया था। टावर को करीब ८ से १० करोड़ रुपए में बेचा जाना था लेकिन पथदर्शी परियोजना के तौर पर मुफ्त में देने की मांग की। २०१६-२०१७ में कलानगर जंक्शन पर दो-तीन एयर प्यूरिफायर टावर लगाए गए लेकिन वहां उसका कोई उपयोग नहीं हैं। लेकिन धूल कहां से आती है? धूल ठेकेदारों और बिल्डरों से आती है लेकिन सरकार उनके पास जाने की हिम्मत नहीं करती। क्योंकि सभी बिल्डर और ठेकेदार उनके दोस्त हैं। इस दोस्ती का दबाव मनपा पर देखा जा रहा है, ऐसा भी उन्होंने कहा।

हमने होर्डिंग पर अपनी फोटो नहीं लगाई
होर्डिंग को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि हमने अपनी फोटो होर्डिंग पर नहीं लगाई। इस साल हिंदूहृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे स्वास्थ केंद्र (आपला दवाखाना) के होर्डिंग पर शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की एक छोटी-सी फोटो है लेकिन एक दूसरे का हाथ पकड़े दो बड़ी फोटो हैं, ऐसा तंज भी इस दौरान आदित्य ठाकरे ने कसा।

राजनीतिक प्रदूषण बढ़ा
मनपा के बजट में प्रदूषण के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि हमने ढाई साल में पर्यावरण पर काफी काम किया है। इसमें मरोल का शहरी जंगल है, एम-पूर्व में ५६ हजार पेड़ लगाए, मुंबई क्लाइमेट एक्शन प्लान बनाया। यह प्रत्येक प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करता है और उन्हें मापता है। लेकिन बिल्डर-ठेकेदारों को प्रदूषण पैâलाने से डर लगता था। कहीं धूल न उड़े, इस बात का ध्यान रखते हुए काम कर रहे थे। अब वायु प्रदूषण बढ़ रहा है, लेकिन पिछले छह महीनों में राजनीतिक प्रदूषण भी बढ़ गया है। जब तक वहां धुंध कम नहीं होती तब तक यहां भी धुंध कम नहीं होगी, ऐसा भी आदित्य ठाकरे ने कहा।

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