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वायरल संक्रमण की चपेट में मुंबई! रोजाना मिल रहे १५ से २० मरीज

सामना संवाददाता / मुंबई
मुंबई पर इस समय वायरल संक्रमण का संकट छाया हुआ है। दस दिनों के भीतर वायरल संक्रमण के काफी सारे केस सामने आए हैं। इसमें विशेष रूप से बच्चों और बुजुर्गों में ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण, निमोनिया और सांस फूलने जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं। चिकित्सकों के मुताबिक, मुंबई में रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल और इन्फ्लूएंजा वायरस के प्रतिदिन औसतन १५-२० मरीज इलाज कराने दवाखानों और अस्पतालों में पहुंच रहे हैं। इस बीच चिकित्सकों ने वायरस के बढ़ते दायरे पर चिंता जताते हुए सावधान रहने की सलाह दी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि लक्षणों को नजरअंदाज न करें और खुद ही दवा न लें।
मुंबई के तापमान में उतार-चढ़ाव और अनियमित बारिश लोगों के स्वास्थ्य के लिए बड़ा झटका बन रही है। इसके चलते श्वसन संबंधी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कहा कि बच्चे, बुजुर्ग, मधुमेह और अस्थमा जैसी बीमारियों से जूझ रहे व्यक्ति इन संक्रमणों की चपेट में आसानी से आ सकते हैं। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले और अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, जन्मजात हृदय रोग, किडनी रोग और अन्य श्वसन जैसे पुराने फेफड़ों की समस्याओं से पीड़ित बच्चों और बुजुर्गों में निमोनिया होने का खतरा होता है, जो यह घातक है। इससे फेफड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है। इसलिए समय पर इलाज जरूरी है।
मौसम में परिवर्तन से बढ़ रहा इन्फ्लूएंजा
इस साल मानसून में हो रहे उतार-चढ़ाव के कारण बच्चों में इन्फ्लूएंजा का खतरा अधिक है। बीते कुछ दिनों से इसके मरीजों की संख्या भी बढ़ी है। चिकित्सकों का कहना है कि वातावरण में बढ़ी हुई नमी इन्फ्लूएंजा वायरस के बने रहने और फैलने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करती है। पिछले १५ दिनों में एच३एन२, आरएसवी, एच१एन१ और अन्य श्वसन वायरस में वृद्धि हुई है।
५ से १० फीसदी मरीज हो रहे भर्ती
जेजे अस्पताल के चिकित्सक डॉ. मधुकर गायकवाड़ ने कहा कि अस्पताल में श्वसन से संबंधित ५ से १० फीसदी रोगियों को ही अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता हो रही है। उन्होंने कहा कि ७५ वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और कई गंभीर बीमारियों के कारण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में गंभीर लक्षण हो सकते हैं।

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