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मुंबई को टीबी का टेंशन!

-हर घर स्क्रीनिंग में बढ़े १३.४२ फीसदी मरीज मनपा एक साल से चला रही है अभियान

सामना संवाददाता / मुंबई

मुंबई से टीबी उन्मूलन के लिए मनपा द्वारा किए जा रहे तमाम प्रयास पूरी तरह से असफल होते दिखाई दे रहे हैं। ये बीमारी कंट्रोल से बाहर होती जा रही है। मुंबई में स्थिति ऐसी हो गई है कि मनपा के साथ ही जनता को टीबी टेंशन देने लगा है। पिछले एक साल से शहर में मुंबई मनपा द्वारा जारी हर घर सर्वे अभियान में पाया गया है कि साल २०२२ के मुकाबले पिछले साल टीबी के नए मामलों में १३.४२ फीसदी की वृद्धि हुई है, जो चिंता का विषय बन गया है।
उल्लेखनीय है कि मुंबई में साल २०२२ की तुलना में पिछले साल टीबी के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। मनपा के स्वास्थ्य विभाग ने साल २०२२ में ५६,११३ टीबी मामले दर्ज किए थे, जो पिछले साल बढ़कर ६३,६४४ पर पहुंच गए। स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि यह वृद्धि घर-घर जाकर जांच और निगरानी के कारण हुई है और लोगों का समय पर इलाज भी शुरू कर दिया गया है। इसके अलावा संशोधित राष्ट्रीय टीबी रोग नियंत्रण कार्यक्रम की तर्ज पर चलाए गए कई अभियानों से स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को मामलों का जल्द पता लगाने और उपचार शुरू करने में मदद मिली।
मरीजों का आरोप है कि भले ही मनपा नए मामलों का पता लगाने के लिए सभी प्रयास कर रही है। हालांकि, उसे यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि दवाओं की कोई कमी न हो। पिछले साल दवाएं न मिलने के कारण कई रोगियों को इलाज बंद करना पड़ा था। इस कारण बीमारी और खतरनाक हो गई।

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