मुख्यपृष्ठस्तंभमुंबई मिस्ट्री : एन. एम. जोशी: ट्रेड यूनियन आंदोलन के पुरोधा

मुंबई मिस्ट्री : एन. एम. जोशी: ट्रेड यूनियन आंदोलन के पुरोधा

विमल मिश्र
मुंबई

१९३० के दशक में बनी भायखला से प्रभादेवी जाने वाली चार किलोमीटर लंबी यह सड़क मध्य रेल की पटरियों के समानांतर चलती है और भायखला, चिंपपोकली और करी रोड उसके तीन स्टेशनों से होकर गुजरती है। भायखला चिड़ियाघर, भाऊजी दाड म्यूजियम और मझगांव जाने के रास्ते यहीं से फूटते हैं। यह मिल मजदूरों का इलाका है और इसे उस नेता के नाम से जाना जाता है, जिन्हें उनकी किस्मत संवारने का सबसे अधिक श्रेय जाता है- नारायण मल्हार जोशी। संक्षेप में एन. एम. जोशी। खूब चलती इस सड़क का लोकप्रिय नाम ‘डिलाइल रोड’-बॉम्बे वॉटरवर्क्स के उन चीफ इंजिनियर एल. डिलाइल के नाम पर, जिन्हें विहार झील बनाने का गौरव हासिल है। इलाके का इसी नाम का फ्लाईओवर पुनर्निर्माण की योजना को लेकर इन ‌दिनों खबर में है।
एन. एम. जोशी, मतलब दार्शनिक, क्रांतिकारी विचारक, स्वतंत्रता सेनानी और ट्रेड यूनियन नेता-एक साथ। जोशी जी का जन्म ५ जून, १८७९ कोलाबा जिले के गोरेगांव में हुआ था। उनके पिता प्रसिद्ध ज्योतिषी थे। प्राथमिक शिक्षा गोरेगांव में पूरी करने के बाद १९०८ में पुणे के डेक्कन कॉलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया। उनका विवाह रमाबाई के साथ हुआ था। नारायणराव के दो भाइयों में महादेवराव संस्कृत पंडित थे और वामनराव मराठी साहित्यकार।
ट्रेड यूनियन पुरोधा
श्रमिक कल्याण और श्रमिक हितों के लिए अपने कार्यों से एन. एम. जोशी जी अमर हो गए हैं। देश में ट्रेड यूनियन आंदोलन का जनक उन्हीं को माना जाता है। १९०९ में वे भारत सेवक समाज और सर्वेंट्स ऑफ इंडिया सोसायटी के सदस्य बने थे। १९११ में उन्होंने बॉम्बे सोशल सर्विस लीग शुरू की। वे प्रादेशिक कांग्रेस कमेटी से भी जुड़े। ११ सितंबर, १९४२ तक संगठन के पीपुल्स वॉल्यूंटियर ब्रिगेड के मुखिया के रूप में उन्होंने ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन में कई महत्वपूर्ण जिम्मदारियां निभार्इं। १९२० में पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के साथ मिलकर ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की स्थापना की। १९२५ से १९२९ तक वे इस संगठन के महासचिव भी रहे।
कांग्रेस में जब साम्यवादियों का प्रभाव बढ़ा तो जोशी जी ने कांग्रेस छोड़कर ट्रेड यूनियन कंफेडरेशन नामक एक नया संगठन बना लिया। ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त रॉयल कमीशन को भेजी उनकी रिपोर्ट को भारत में श्रमिकों व कामगारों की कार्यस्थिति में सुधार का काफी श्रेय दिया जाता है। १९१९ में उन्होंने पहली इंटरनेशनल लेबर कांप्रâेंस में भाग लिया था, जिसे अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन के गठन का श्रेय दिया जाता है। इसमें १९२२ से १९४८ तक जोशी जी भारतीय मजदूरों का प्रतिनिधित्व करते रहे। वे रिलीज्ड पेंशन एंड सोसायटी, लीगल एंड सोसायटी, बॉम्बे प्रेसिडेंसी सोशल रिफॉर्म एसोसिएशन, इंडियन ट्रेड यूनियन कांग्रेस तथा सिविल लिबर्टीज यूनियन, आदि संस्थाओं से जुड़े रहे और देश की आजादी के बाद १९४७ में केंद्रीय वेतन आयोग के एक सदस्य भी रहे। वे दिल्ली की सेंट्रल असेंबली विधानसभा में भी चुने गए।
जोशी जी सांप्रदायिक सद्भाव के पहरुआ थे। उनकी सामाजिक सेवाएं भी सराहनीय हैं। महिलाओं व बच्चों के लिए कई चिकित्सालयों और औद्योगिक प्रशिक्षण के लिए विद्यालयों की स्थापना का श्रेय भी उन्हें दिया जाता है।
३० मई, १९५५ को ७६ वर्ष की आयु में एन. एम. जोशी का मुंबई में देहांत हो गया।

(लेखक ‘नवभारत टाइम्स’ के पूर्व नगर संपादक, वरिष्ठ पत्रकार और स्तंभकार हैं।)

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