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मोटरमैनों का असहयोग आंदोलन त्रस्त हुए मुंबईकर! सेंट्रल रेलवे के अंदरूनी विवाद का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ा

सामना संवाददाता / मुंबई
रविवार के दिन मोटरमैनों के असहयोग आंदोलन से मुंबईकर त्रस्त नजर आए। मध्य रेलवे लाइन पर चलने वाली हर ट्रेनें करीब १ से १:३० घंटे लेट रहीं। ये आंदोलन मोटरमैनों पर रेलवे की तरफ से की जा रही करवाई को लेकर किया जा रहा था। बता दें कि सेंट्रल रेलवे पर लोकल चलाते समय मोटरमैन कभी-कभी अनजाने में सिग्नल नियम तोड़ देते हैं। इस दौरान लोकल ट्रेन सिग्नल के कुछ फीट आगे जाकर खड़ी हो जाती है। इस गलती के लिए रेलवे प्रशासन की ओर से कई मोटरमैनों के खिलाफ अनिवार्य सेवानिवृत्ति (सीआरएस) की कार्रवाई की जा रही है। रेलवे की इस अंदरूनी विवाद के चलते आम जनता को खामियाजा भुगतना पड़ा।
इस कार्रवाई के डर से शुक्रवार को मोटरमैन मुरलीधर शर्मा (५४) ने आत्महत्या कर ली। इसके बाद से मोटरमैन यूनियन द्वारा प्रशासन के खिलाफ विरोध किया जा रहा था। हालांकि, कल शाम तक रेलवे प्रशासन द्वारा मिले आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म कर दिया गया। एक यात्री ने बताया कि ठाणे से दादर पहुंचने में करीब २ से २:३० घंटे का समय लगा। बता दें कि शनिवार को १०० से ज्यादा लोकल ट्रेनों को रद्द करना पड़ा साथ ही इससे दोगुनी लोकल ट्रेनें रविवार तक देरी से चल रही थीं। सेंट्रल रेलवे प्रशासन के अंदरूनी विवाद का खामियाजा मुंबईकरों को भुगतना पड़ा है।

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