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मुुंबईकरों सावधान…वायु प्रदूषण भी बढ़ा रहा है डायबिटीज!

-पीएम २.५ से प्रभावित होता है इंसुलिन का स्राव

-`जर्नल ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया’ का खुलासा

सामना संवाददाता / मुंबई

प्रदूषित हवा से फेफड़ों की पुरानी बीमारियां, दिल का दौरा, स्ट्रोक और वैंâसर होने की ही आशंका नहीं बनी रहती है, बल्कि इसका सीधा असर डायबिटीज से भी है। देश में निर्धारित किए गए पीएम २.५ के संपर्क में मामूली वृद्धि भी खून में डायबिटीज के स्तर को बढ़ा सकती है। चिकित्सकों ने मुंबईकरों को सावधान करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण से यदि बच कर नहीं रहा गया तो इससे डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है। एक सर्वे के मुताबिक, मुंबई में हर साल प्रदूषण की चपेट में आने से करीब दो हजार लोगों की मौत होती है।
उल्लेखनीय है कि मई के शुरुआती दिनों में मुंबई से प्रकाशित होनेवाली देश की एक प्रमुख चिकित्सा पत्रिका ‘जर्नल ऑफ एसोसिएशन ऑफ फिजिशियंस ऑफ इंडिया’ ने वायु प्रदूषण टाइप २ मधुमेह का एक नया कारण? शीर्षक से एक संपादकीय प्रकाशित किया। इसमें इसके लेखक चेन्नई के मधुमेह विशेषज्ञ डॉ. वी मोहन ने बताया है कि अब हम जानते हैं कि पीएम २.५ एक एंडोक्राइन डिसरप्टर है, जो इंसुलिन के स्राव को प्रभावित करता है और इंसुलिन प्रतिरोध की ओर भी ले जाता है। हालांकि, गर्मियों के कारण हाल के हफ्तों में हवा की गुणवत्ता ठीक रही है, लेकिन वायु प्रदूषण शहरी हिंदुस्थान में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर उभर रहा है। अनुमान है कि हर साल मुंबई में वायु प्रदूषण से लगभग २०,००० और दिल्ली में ५०,००० लोग इसके चलते काल के गाल में समा जाते हैं।
पूरे देश में लागू नहीं हो सकता अध्ययन
इस अध्ययन के लिए दिल्ली और चेन्नई में रहने वाले १२,०६४ वयस्कों पर सात साल तक शोध किया गया। अध्ययन में हवा की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए दो तरीके अपनाए गए, जिसमें एक तो सैटेलाइट के जरिए जानकारी ली गई और दूसरा जमीन पर लगे मॉनिटरों से जानकारी मिली। साथ ही प्रतिभागियों के ब्लड शुगर लेवल की भी जांच की गई। अध्ययन में पाया गया कि हवा में हर साल औसतन पीएम २.५ की मात्रा में १० ग्राम प्रति घन मीटर की वृद्धि के साथ टाइप-२ डायबिटीज का खतरा २२ प्रतिशत बढ़ जाता है।

दुनिया में हिंदुस्थान है मधुमेह की राजधानी
चिकित्सकों का कहना है कि हिंदुस्थान को दुनिया की मधुमेह की राजधानी के रूप में जाना जाता है, लेकिन यहां वायु प्रदूषक रोग के बोझ में योगदान दे रहा है। मिट्टी प्रदूषण, जानवरों को दी जानेवाली दवाएं, खराब स्वच्छता जैसे अन्य स्रोत हैं, जो सभी कई तरह के रोगों को बुलावा देते हैं। मुंबई में सब्जियां खतरनाक तरीके में न केवल उगाई, बल्कि व्यापक रूप में बेची जाती हैं। वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. शशांक जोशी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन से मौसम के पैटर्न में व्यवधान पैदा होता है, जिसके परिणामस्वरूप बीमारी के पैटर्न में बदलाव होता है। उन्होंने आगे कहा कि वायु, जल और वाहनों से होनेवाला प्रदूषण इसे और भी बदतर बना देता है। डॉ. मोहन ने कहा कि वायु प्रदूषण रोकथाम बीमारियों को कम कर सकता है।

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