मुख्यपृष्ठटॉप समाचारमुंबईकरों का मोदी से मनुहार : अबकी फोड़ो महंगाई की हंडी!

मुंबईकरों का मोदी से मनुहार : अबकी फोड़ो महंगाई की हंडी!

  •  ५०० रुपए की कान्हा की पोशाक ८०० रुपए में
  • सूखे मेवे के साथ ही दूध-दही की कीमतों में भी उछाल

कुमार नागमणि / मुंबई
देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है। इसके साथ ही महानगरी मुंबई में दही-हंडी फोड़ने के लिए मंडलों द्वारा ऊंचे-ऊंचे पिरामिड बनाए गए हैं। हर कोई अपने-अपने तरीके से कान्हा को रिझाने में जुटा है। दूसरी तरफ देश में रोजाना बढ़ रही महंगाई का असर दही-हंडी पर भी पड़ा है। कान्हा के भोग से लेकर दही-हंडी तक महंगाई की मार से बच नहीं पाए हैं। प्रसाद बनाने में इस्तेमाल होनेवाली सभी चीजों के दाम बढ़ गए हैं। उनके श्रृंगार का सामान व पोशाकें  महंगी हो गई हैं। पिछले साल की अपेक्षा डेढ़ से दो गुना तक दाम बढ़ गए हैं। ऐसे में मुंबईकर प्रधानमंत्री मोदी से मनुहार करते हुए एक ही बात कह रहे हैं कि हम इस बेतहाशा बढ़ती महंगाई से परेशान हैं इसलिए इस बार आप महंगाई की हंडी फोड़कर देश की जनता को राहत प्रदान कीजिए।
बता दें कि वैसे तो श्रद्धा के आगे लोग महंगाई को महसूस नहीं करते, लेकिन इस बार महंगाई लड्डू गोपाल पर भारी पड़ रही है। कान्हा के जन्म की खुशियां मनाने के लिए लोग तैयार हैं तो बाजार भी पूरी तरह सज चुके हैं। जन्माष्टमी का रंग बाजारों पर छाने लगा है। दुकानों पर लड्डू गोपाल की प्रतिमाएं, पोशाक, मुकुट, बांसुरी से लेकर मटके तक उपलब्ध हैं। शहर में पूजन सामग्री बेचनेवालों के पास ग्राहक भी पहुंच रहे हैं। महिलाएं भी अपने बच्चों के लिए कान्हा की पोशाक खरीद रही हैं। लेकिन इस बार सामान पहले की तुलना में महंगा मिल रहा है। अलका मिश्रा के मुताबिक छोटे से लेकर बड़ा सामान डेढ़ से दो गुना ज्यादा महंगा मिल रहा है।
छोटे बच्चों के लिए कान्हा की पोशाक काफी महंगी मिल रही है। बीते वर्ष जहां ५०० रुपए तक में अच्छी पोशाक मिल रही थी, वहीं इस बार वह ८०० रुपए में मिल रही है। कपड़े के व्यापारी संजय गुप्ता ने बताया कि ड्रेस महंगे रेट पर ही बेचने के लिए मिल रहे है। इसके लिए सिर्फ जीएसटी और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जिम्मेदार है। पं. प्रदीप त्रिपाठी ने बताया कि कान्हा के भोग में पांच चीजें जरूरी होती हैं। भोग में देसी घी, सूखे मेवे व इलायची से तैयार की गई आटे की पंजीरी, माखन-मिश्री, मखाना-पाग, मखाने की खीर और पंचामृत शामिल हैं, जिससे लड्डू गोपाल को नहलाया जाता है। मखाना, गरी, चिरौंजी, किशमिश, छुआरा, मेवे और देसी घी से प्रसाद तैयार होता है। लेकिन बाजारों में सूखे मेवे के दाम आसमान छू रहे हैं। व्यापारी संदीप घनाते ने बताया कि खपत कम और डिमांड अधिक होने के कारण मेवा खरीदना लोगों के लिए मुश्किल हो रहा हैं। एपीएमसी बाजार में कोई भी चीज ५०० रुपए से कम में नहीं मिल रही। दूध-दही और देसी घी के दाम भी बढ़ गए हैं। इन सबके पीछे जीएसटी प्रमुख कारण बताया जा रहा है।

जन्माष्टमी से जुड़ी सामग्री
सामान कीमत
मेटल झूला २५० से ५००
मुकुट ६० से १५०
बांसुरी २० से ५०
पोशाक ३० से २५०
मिट्टी की हंडी ७० से १५०
बच्चों की पोशाक २५० से ८५०

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