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मुंबई की बिगड़ी आबोहवा!  वैश्विक स्तर पर पांचवें रैंक पर मायानगरी

  • शिंदे-फडणवीस सरकार के सामने बड़ी चुनौती

विनय यादव / मुंबई
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की आबोहवा बिगड़ती जा रही है। बढ़ते प्रदूषण ने शिंदे-फडणवीस सरकार की चिंता बढ़ा दी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट में प्रदूषण के मामले में वैश्विक स्तर के शहरों की सूची में मुंबई पांचवें स्थान पर है। अब देखना यह होगा कि प्रदूषण के बिगड़ते हालात से शिंदे-फडणवीस सरकार कैसे निपटती है?
‘सफर’ प्रदूषण मापन प्रणाली के अनुसार मुंबई शहर दुनिया में वायु प्रदूषण के कारण सबसे अधिक मौतों की सूची में पांचवें स्थान पर है। मुंबई का प्रदूषण दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। ग्रीनपीस दक्षिण पूर्व एशिया द्वारा आईक्यूएयर डेटा के हालिया विश्लेषणात्मक-अनुसंधान अध्ययन में मुंबई शहर में वायु प्रदूषण से २५ हजार लोगों की मौत हुई है। महाराष्ट्र में वायु प्रदूषण खतरे के स्तर को पार कर गया है, जिससे महाराष्ट्र में करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा हो गया है। सवाल उठ रहे हैं कि मुंबईकरों के स्वस्थ जीवन हेतु प्रदूषण को कम करने के लिए राज्य सरकार क्या उपाय कर रही है? डब्ल्यूएचओ की २०१६ में प्रकाशित रिपोर्ट के हवाले से शिंदे-फडणवीस सरकार ने भी माना है कि दुनियाभर में प्रदूषित शहरों की सूची में मुंबई पांचवें पायदान पर है। महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से मुंबई व उपनगर में ११ वायु सर्वेक्षण केंद्रों के माध्यम से हवा की गुणवत्ता मापी जाती है। इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) आमतौर पर संतोषजनक से मध्यम गुणवत्ता वाला होता है। पीएम १० व पीएम २.५ प्रदूषण मानक में कुछ स्थानों पर वृद्धि दिखाई दे रही है। हालांकि ग्रीनपीस दक्षिण पूर्व एशिया की अध्ययन रिपोर्ट को लेकर राज्य सरकार अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है।
मुंबई वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्य योजना पर बल
महाविकास आघाड़ी सरकार में पर्यावरण मंत्री पद पर रहते हुए आदित्य ठाकरे ने मुंबई मनपा के सहयोग से मुंबई वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्य योजना पर विशेष जोर दिया था। केंद्रीय  प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अक्टूबर २०१२ में मुंबई वायु प्रदूषण नियंत्रण कार्य योजना को अनुमोदित किया था। इस योजना के तहत मुंबई में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए सौर ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों का निर्माण, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, यातायात को सुव्यवस्थित करना, श्मशान में प्राकृतिक गैस (पीएनजी), स्वचालित वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (सीएएक्यूएमएस) की स्थापना, कचरे से बिजली उत्पादन, सड़कों को साफ करने के लिए यांत्रिक झाड़ू का उपयोग और मियावाकी संकल्पना पर आधारित जैव विविधता वाले पार्क विकसित करना शामिल हैं।

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