मुख्यपृष्ठस्तंभमुंबई की भक्ति ने मन मोह लिया : राजनजी महाराज

मुंबई की भक्ति ने मन मोह लिया : राजनजी महाराज

कविता श्रीवास्तव

सुप्रसिद्ध भागवत मर्मज्ञ एवं लोकप्रिय रामकथा वाचक श्रद्धेय राजनजी महाराज ने कहा है कि मुंबईवासियों में भक्ति के प्रति रुझान देखकर वे बहुत प्रभावित हुए हैं। श्रद्धालुओं की इस अपार भक्ति ने उनका मन मोह लिया है। देश-विदेश में अनगिनत रामकथा कार्यक्रमों को अपना सानिध्य प्रदान कर चुके लोकप्रिय राजनजी महाराज ने ‘दोपहर का सामना’ से विशेष बातचीत करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं में इतना उमंग, इतना उत्साह उन्होंने काशी के बाद केवल मुंबई में ही देखा और बहुत ही रोमांचित महसूस किया है।

आज की फिल्मों के अनुसरण से युवाओं पर बढ़ते कुप्रभाव के प्रश्न पर महाराजश्री ने कहा कि फिल्म वालों की ही नहीं समाज के निर्माण में कथाकार, चित्रकार, पत्रकार, कलाकार सबकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अच्छे संस्कारों से आदर्शवादी विचार और कुशल व्यवहार की नींव पड़ती है। उन्होंने कहा कि जब चित्त अच्छा होगा तो चिंतन भी अच्छा होगा, उसी से व्यवहार भी अच्छा होगा और आचरण भी अच्छा होगा। बच्चों में ऐसे संस्कार पड़ें, इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले मां-बाप स्वयं संस्कारों में रहें।

पिछले १३ वर्षों से रामकथा सुना रहे राजनजी महाराज ने बताया कि वे रामकथा गाने में सफल हुए हैं तो यह उनके माता-पिता के पुण्य-प्रताप और उनके संस्कारों का ही परिणाम है। उन्होंने बताया कि उनकी माताजी उत्तरभारत से गंगा के गोमुख से जल लेकर दक्षिण के रामेश्वर तक जाया करती थीं। इस यात्रा में उन्हें गोद में लिए रहती थीं। उनमें भक्ति के संस्कार तब से ही पड़ने लगे और आज समूचे विश्व में घूम-घूमकर रामकथा गाने का शुभअवसर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ईश्वर यह पुनीत कार्य उन्हें सौंपेंगे, इसका उन्हें आभास भी नहीं था।

राजनजी महाराज ने कहा कि मुंबई की धरती धन्य है। यह पावन भूमि है जहां अनेक जगह रामकथाएं, भागवत कथाएं व धार्मिक आध्यात्मिक उत्सव व उपक्रम चल रहे हैं। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र संतों की भूमि है। यहां धर्म को युवावस्था प्राप्त है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की धरती को नमन करना चाहिए, जहां छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे वीर योद्धा हुए जिन्होंने हिंदुत्व की रक्षा की और हिंदुत्व का स्वाभिमान ऊंचा करके भगवा ध्वज को गौरव प्रदान किया।

राजनजी महाराज के पावन मुखारविंद से इन दिनों कांदिवली-पूर्व में ठाकुर संकुल के मनोरंजन मैदान पर रामकथा का भव्य आयोजन चल रहा है। मुंबई में पहली बार कथा श्रवण कराने पहुंचे राजनजी महाराज को सुनने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। महाराजश्री की सुमधुर वाणी से भोजपुरी, अवधी, मैथिली व उत्तरभारत के लोकगीतों, ग्रामीण भजनों और ठेठ देसी शैली के भजनों-कीर्तनों का भी लोग जमकर लुत्फ उठा रहे हैं। आयोजन रामकथा समिति के अध्यक्ष दीपक जायसवाल, जयनारायण तिवारी, एडवोकेट प्रीति पांडेय आदि ़के सहयोग से हो रहा है।

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