मुख्यपृष्ठनए समाचारमनपा उड़ा रही जनता की नींद! रात में उपनगरों में कर रही...

मनपा उड़ा रही जनता की नींद! रात में उपनगरों में कर रही कार्रवाई कितने दिन चलेगा ये दिखावा?

संदीप पांडेय / मुंबई
मुंबई मनपा दिखावे का काम करने में अव्वल है। यह हम नहीं, बल्कि उनके काम करने का तरीका बताता है। जहां अभी तक मनपा को अपने कर्तव्य का खयाल नहीं था, गहरी निद्रा में थी, वहीं अब अचानक मनपा के कर्मचारी रात में जनता की नींद उड़ाते हुए कार्रवाई करते दिखाई दे रहे हैं। मुंबई उपनगरों में सड़कों के दोनों किनारे फुटपाथ पर अवैध कारोबार करने वालों पर अभी तक मनपा की नजर नहीं पड़ी थी, लेकिन अब अचानक उसे पैदल चलने वाले राहगीरों को होने वाली असुविधा का ख्याल आया है और उसने फुटपाथों पर से अवैध ठेलों और स्टालों को हटा दिया है।
मनपा सड़कों पर ब्रेकर और डिवाइडर बनाकर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ रही थी, जिसके चलते सड़कों पर चलने वाले लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा था। अब अचानक मनपा को अपनी ये बड़ी भूल याद आ गई है और मनपा कर्मचारी रात में डिवाइडर और स्पीड ब्रेकरों को पेंट करते दिखाई दे रहे हैं। इतना ही नहीं, मनपा के कर्मचारी रात में सभी कार्रवाईयां अपनी अतिक्रमण गाड़ियों और जेसीबी के साथ कर रहे हैं।
इन कार्रवाईयों से होने वाले आवाज से आस-पास रहने वाले नागरिकों की नींद में खलल पड़ रहा है। साथ ही अवैध फेरीवालों को फुटपाथ पर शनिवार को कारोबार नहीं करने की भी बात कही गई है। मुंबई के निवासियों से जब मनपा की इस कार्रवाई को लेकर बातचीत की गई तो चंदन पाटील ने कहा कि ये शुरूआत तो अच्छी है, लेकिन यह कब तक चलेगा भगवान ही जाने?
जितेंद यादव ने कहा कि यह पूरी मुंबई की कहानी है। पहले सड़कों, फुटपाथों और गलियों को बनाया जाता है, फिर किसी बहाने से उसकी खुदाई करके फिर से बनाया जाता है। इससे हेराफेरी करने में आसानी होती है। मनपा की ये योजना भी कुछ ही दिनों के लिए ही है। कुछ दिन बाद हर बार की तरह ये योजना भी धराशायी हो जाएगी।

नींद में पड़ रहा खलल
सुरेंद्र पवार ने कहा कि मनपा की ये कार्रवाई सिर्फ दिखावा है। जिन सड़कों की मरम्मत की जरूरत नहीं है, उन्हें साल में दो बार बनाया जाता है और जिनको वास्तव में मरम्मत की जरूरत है उस पर मनपा का ध्यान ही नहीं है। मनपा द्वारा रात में कार्रवाई करने से हमारी नींद में खलल पड़ रहा है। मनपा ने अभी फुटपाथों पर अतिक्रमण करने वाले अवैध फेरीवालों को हटा तो दिया है, लेकिन दुर्भाग्य से प्रणालीगत परिवर्तन के बिना, कल ये फिर से हर बार की तरह व्यवसाय में वापस आ जाएंगे, क्योंकि `हफ्ता’ नागरिक-केंद्रित पहलों से अधिक महत्वपूर्ण है।

अन्य समाचार