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बेस्ट के लिए मनपा की आर्थिक मदद  ‘ऊंट के मुंह में जीरा’! …मांग के अनुसार नहीं मिल रहा है पैसा

सामना संवाददाता / मुंबई
घाटे में चल रही बेस्ट को उबारने के लिए मुंबई महानगरपालिका द्वारा आर्थिक सहायता दी जा रही है, लेकिन बेस्ट के लिए यह आर्थिक सहायता ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ वाली कहावत साबित हो रही है। यानी यह सहायता बेस्ट के लिए अपर्याप्त साबित हो रही है। बता दें कि बेस्ट का वित्तीय घाटा बढ़कर अब लगभग २,५०० करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। बेस्ट प्रशासन ने जब अपना बजट पेश किया था तो उस समय बेस्ट ने ३,००० करोड़ रुपए की मांग की थी। लेकिन मनपा प्रशासन की तरफ से ५०० करोड़ रुपए का नया फंड मंजूर किया गया है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में बेस्ट को ८०० करोड़ रुपए पहले ही दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद यह मदद बेस्ट के लिए नाकाफी साबित हो रही है।
आर्थिक सहायता काफी नहीं
मनपा द्वारा बेस्ट को बुनियादी ढांचे के विकास और पूंजीगत उपकरणों की खरीद, दिन-प्रतिदिन के खर्च, अल्पकालिक ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। पिछले दो वर्षों के लिए बेस्ट को ८०० करोड़ रुपए की सब्सिडी की घोषणा की गई है। साथ ही अलग-अलग मदद भी दी जाती है। २०२२-२३ में भी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाये का भुगतान करने के लिए अधिक धनराशि प्रदान की गई थी। बेस्ट को १,३८२ करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता दी गई है। इस वित्तीय वर्ष भी ८०० करोड़ रुपए के अलावा ५०० करोड़ रुपए यानी कुल मिलाकर १,३०० करोड़ रुपए की मदद दी गई है। लेकिन ये राशि बेस्ट के लिए काफी नहीं है।
लगातार बढ़ रहा है बेस्ट का घाटा 
बताया जाता है कि बेस्ट को हर महीने करीब १५० से २०० करोड़ रुपए का घाटा होता है। जुलाई २०२३ में बेस्ट का वित्तीय घाटा ७४४ करोड़ रुपए था। वित्तीय वर्ष के अंत में यह घाटा बढ़ते-बढ़ते ढाई से तीन हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है। लेकिन मनपा की ओर से सिर्फ ८०० करोड़ रुपए की ही मदद की जा रही है। इसके अलावा बेस्ट का संचित घाटा करीब ८ हजार करोड़ रुपए हा गया है।

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