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मनपा बनाएगी डॉक्टर और इंजीनियर!

  • छात्रों के सपनों को लगा पंख, पूरी होगी ऊंची उड़ान
  • प्रोफेशनल कोर्स पूरा होने तक खर्च उठाएगी मनपा
  • छात्रों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी तो मनपा स्कूलों की मेरिट सुधरेगी

सामना संवाददाता / मुंबई
देश में मुंबई महानगरपालिका अपने आप में शायद ही ऐसी पहली महानगरपालिका है जो अपने स्कूलों में पढ़ने वाले दसवीं के टॉपरो को डॉक्टर, इंजीनियर जैसे कई प्रोफेशनल बनाने के लिए पूरा आर्थिक मदद करती है। मुंबई महानगरपालिका स्कूलों के २५ टॉपरों के लिए यह योजना शुरू की गई है। इन छात्रों को ११ वीं में प्रवेश से लेकर प्रोफेशनल कोर्सेस सहित स्नातक होने तक शिक्षा शुल्क का भुगतान मनपा करती है।
इस योजना से मनपा स्कूलों के २५
टॉपरों को डॉक्टर, इंजीनियर अन्य प्रोफेशनल बनाएगी और इसके लिए छात्रों को आर्थिक समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। इन छात्रों के अपने सपने बिना किसी अड़चन के पूरा होंगे। मनपा अधिकारी के अनुसार इससे एक तरफ जहां मनपा स्कूलों में छात्रों में शिक्षा के प्रति प्रोत्साहन मिलेगा तो वहीं गरीब और मजबूर तबके के छात्रों को उच्च शिक्षा और हाई प्रोफेशनल कोर्सेस के लिए आर्थिक मदद मिलेगी।
उल्लेखनीय है कि मनपा स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता को बढ़ाने पर मनपा पूरा जोर दे रही है। इस बार मनपा स्कूलों में दसवीं के छात्रों ने लगभग ९८ प्रतिशक्त परिणाम लाया है। ऐसे में माना जा रहा है कि अब मनपा स्कूलों में शिक्षा गुणवत्ता काफी बेहतर हो रही है। छात्रों को टॉपर की लिस्ट में लाने के लिए मनपा ने उनके बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ाने के लिए यह योजना शुरू की है।
मनपा करेगी फीस का भुगतान
इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए मनपा के संयुक्त आयुक्त अजीत कुम्भार ने बताया कि टॉपरों की सूची में आने वाले टॉप २५ छात्रों को यह लाभ दिया जाता है। इन छात्रों को १०वीं के बाद किसी भी विषय में प्रवेश के लिए और उन्हें स्नातक तक शुल्क नहीं भरना पड़ेगा। ये छात्र यदि डॉक्टर इंजीनियर या अन्य प्रोफेशनल्स  पाठ्यक्रम में प्रवेश लेते हैं तो भी उनका शुल्क मनपा अदा करती है। एक से डेढ़ लाख रुपए अथवा जो भी शुल्क होगा मनपा भुगतान करेगी, मनपा पीछे नहीं हटेगी।
दो वर्ष पहले शुरू हुई योजना
कुम्भार ने बताया कि इससे मनपा स्कूलों में बच्चों के बीच टॉपर बनने की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। टॉपर्स की लिस्ट में आने के लिए बच्चे आपस में खूब कंप्टीशन कर रहे हैं और इसका लाभ भी अब उन्हें मिल रहा है। यह योजना २ वर्ष पहले शुरू की गई थी लेकिन कोरोना के चलते यह मामला थोड़ा ठंडा पड़ गया था।

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