" /> ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ ने बदली तकदीर…!

‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ ने बदली तकदीर…!

जीवन के किस मोड़ पर इंसान को सफलता मिलेगी और उसकी जिंदगी कब किस करवट बैठेगी, ये कोई नहीं जानता। ऐसे ही एक कलाकार, जो उम्र के ३२वें पायदान पर थिएटर से जुड़े और तकरीबन एक दशक बाद ४२ साल की उम्र में उन्हें एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म मिली। उस एक्सपेरिमेंटल फिल्म को एक मशहूर निर्माता ने क्या देखा उनकी तकदीर बदल गई। निर्माता ने उनके हाथ में साइनिंग अमाउंट का चेक थमाते हुए उन्हें अपनी आनेवाली उस फिल्म के लिए साइन कर लिया, जिसकी न तो कहानी तैयार थी और न ही रूप-रेखा।
मुंबई के एक पारसी परिवार में २ दिसंबर, १९५९ को जन्मे बोमन ईरानी के पिता का देहांत उनके जन्म के ६ महीने पहले ही हो गया था। पति की मौत के बाद अपनी मेहनत के बलबूते बोमन को पाल-पोसकर बड़ा करनेवाली बोमन की मां भी फिल्मों की शौकीन थीं। ज्यादातर बच्चों के माता-पिता जहां अपने बच्चों को फिल्मों से दूर रखते हैं और सोचते हैं कि उनके बच्चे कहीं फिल्म देखकर न बिगड़ जाएं, वहीं बोमन की मां उनसे कहतीं, ‘तूने अपने स्कूल का होमवर्क कर लिया कि नहीं?’ जब बोमन कहते, ‘हां, कर लिया है।’ तब बोमन की मां उनसे कहतीं, ‘थिएटर में बहुत अच्छी फिल्म लगी है, जा तू उसे देख आ। उसमें सीखने के लिए बहुत कुछ है। उस फिल्म को देखकर तू बहुत कुछ सीखेगा।’ बोमन कहते हैं, ‘जब मैं अपनी मां के पेट में था और मेरी मां जब कभी फिल्म देखने जाती थीं तब मैं भी उनके साथ उस फिल्म को देखता था। मुझे यकीन है कि मुझमें फिल्मों का क्रेज बड़े होने के बाद नहीं, बल्कि उन दिनों आया जब मैं अपनी मां के पेट में था। बड़ा होने के बाद जब मैं अपने वेफर की दुकान जिसे मां संभालती थीं, पर बैठता था तब भी मुझे सिनेमा अट्रैक्ट करता था। मैं हर उस फिल्म को जो उस समय सिनेमाघर में लगती उसे एक बार नहीं, बल्कि बार-बार देखता था। मुझे नहीं लगता कि आज कोई भी मां अपने बच्चे को इस तरह फिल्म देखने के लिए प्रोत्साहित करती होगी।’ एक दिन उनकी मां बीमार पड़ गर्इं और उनके बीमार होने के बाद छह महीनों के लिए बोमन को दुकान पर क्या बैठना पड़ा, दुकान संभालने की जिम्मेदारी उन पर आ गई और लगभग १२ सालों तक उन्होंने दुकानदारी की। ३२ वर्ष की उम्र तक दुकानदारी करनेवाले बोमन ने ३२ साल की उम्र में एक बेसिक वैâमरा खरीदा। छोटे-मोटे जॉब्स लेकर फोटोग्राफी करनेवाले बोमन को अब इससे साइड इनकम भी होने लगी। फोटोग्राफी के दौरान ही शियामक डावर ने उनका परिचय थिएटर से करवाया। ऐसे ही दिन बीत रहे थे कि ४२ साल की उम्र में उन्हें एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म ‘लेट्स टॉक’ मिली, जिसे ८ दिनों के अंदर हैंडीवैâप से शूट किया गया था। महज ८ दिनों में एक्सपीरियंस के लिए बनाई गई फिल्म ‘लेट्स टॉक’ को बस ऐसे ही बनाकर रख लिया गया था। ये फिल्म सिनेमाघरों में नहीं रिलीज होनेवाली थी। ऐसे बनाकर रखी गई फिल्म को जब विधु विनोद चोपड़ा ने देखा तो उन्हें ये फिल्म बेहद पसंद आई और बोमन की परफॉर्मेंस से वे काफी प्रभावित हुए। फिल्म देखने के बाद विधु विनोद चोपड़ा ने बोमन से कहा, ‘आपको तो फिल्मों में काम करना चाहिए। ये लो २ लाख रुपए का चेक।’ चेक को हाथ में लेते हुए बोमन ने पूछा, ‘किस फिल्म के लिए?’ इस पर विधु विनोद चोपड़ा ने कहा, ‘फिलहाल, अभी तो मेरे पास कोई फिल्म नहीं है?’ बोमन ने चौंकते हुए पूछा, ‘तो फिर ये चेक किसलिए?’ बोमन के सवाल का जवाब विधु विनोद चोपड़ा ने मुस्कुराते हुए दिया, ‘इसलिए कि अगले साल दिसंबर में मैं फिल्म बनाऊंगा या नहीं, ये मुझे नहीं पता लेकिन मैं आपको अभी से दिसंबर के लिए बुक कर रहा हूं।’ तब बोमन ने कहा, ‘अभी से क्यों?’ अब विधु विनोद चोपड़ा ने कहा, ‘फिल्म ‘लेट्स टॉक’ को किसी भी तरह रिलीज करेंगे। जब ये फिल्म रिलीज होगी और लोग आपकी परफॉर्मेंस को देखेंगे तो हर कोई यही कहेगा कि ये एक्टर मुझे चाहिए। उस वक्त आप मुझे डेट्स नहीं दोगे इसलिए मैं आज ही आपको साइन कर रहा हूं।’ ठीक छह महीने बाद विधु विनोद चोपड़ा ने बोमन ईरानी को फोन करते हुए कहा, ‘मेरे पास फिल्म आ गई है।’ बोमन ने पूछा, ‘कौन-सी फिल्म है।’ विधु विनोद चोपड़ा ने कहा, ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस!’ फिल्म का नाम बोमन ईरानी को कुछ अजीब-सा लगा। खैर, दिसंबर महीने के अंत में ‘मुन्नाभाई एमबीबीएस’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई। साल के अंत में रिलीज हुई इस फिल्म ने सफलता के ऐसे झंडे गाड़े कि नए साल की शुरुआत में बोमन ईरानी की जिंदगी हमेशा के लिए बदल गई।