" /> प्रेम त्रिकोण में मर्डर

प्रेम त्रिकोण में मर्डर

बीवी की बेवफाई का शिकार हुआ पति
प्रेमी की मदद से पति की कर दी हत्या
ऑटो से ले जाकर खाड़ी में पेंâकी लाश
हिंदुस्थान की संस्कृति में जिस पति-पत्नी के रिश्ते को जन्म-जन्मांतर का साथ माना जाता है, उस पर मानों किसी की नजर लग गई है। कोरोना काल में सिर्फ संक्रमित ही नहीं मर रहे हैं, बल्कि पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहा है। इसी के साथ विवाहेत्तर संबंधों के शिकार बन रहे बदनसीबों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जीवनसाथी के नाजायज संबंधों के कारण हत्या या खुदकुशी की घटनाएं देश भर में घट रही हैं। करीब १५ दिन पहले दहिसर में एक महिला ने अपने प्रेमी की मदद से पति का कत्ल करके लाश को घर में दफना दिया था। अब मुंबई से सटे ठाणे जिले में बीवी की बेवफाई का एक ऐसा ही मामला सामने आया है। जिसमें पत्नी ने प्रेमी और उसके दोस्त की मदद से पति को मौत के घाट उतार दिया और अपना पाप छिपाने के लिए लाश को काफी दूर ले जाकर खाड़ी में फेंक दिया था।
खुद ही दर्ज कराई शिकायत
डोंबीवली-पूर्व स्थित मानपाडा गांव में रहनेवाला प्रदीप पटेल (बदला हुआ नाम) अचानक लापता हो गया था। ४ जून को उसकी पत्नी लता ने उसकी गुमशुदगी की शिकायत कल्याण के मानपाडा पुलिस थाने में दर्ज कराई थी। मानपाडा पुलिस के साथ कल्याण क्राइम ब्रांच की यूनिट-३ भी मामले की समानांतर जांच कर रही थी। वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक संजू जॉन के मार्गदर्शन में यूनिट-३ की टीम को मृतक और उसकी पत्नी के कॉल रिकार्ड से दाल में काला होने का शक हुआ। लता एक अलग नंबर वाले शख्स के कुछ ज्यादा संपर्क में थी। लिहाजा, यूनिट के अधिकारियों ने लता से पूछताछ करने का निर्णय लिया। पूछताछ के दौरान लता यूनिट- ३ के अधिकारियों को गुमराह करने की कोशिश करती रही। उसने पहले बताया कि १ और २ जून को वह प्रदीप के साथ मानपाडा स्थित अपने घर में ही थी। लेकिन कॉल रिकार्ड से उसके व्रजेश्वरी क्षेत्र में होने का प्रमाण यूनिट-३ के अधिकारियों को मिला था।
प्रेमी के घर में पति का कत्ल
प्रदीप के गुमशुदगी मामले की जांच कर रहे यूनिट-३ के विलास पाटील, भूषण दायमा, नितिन मुदगुन और मोहन कलमकर की टीम को पता चला कि लता मोबाइल पर जिस व्यक्ति के संपर्क में थी वह रवींद्र उर्फ मनीराम (बदला हुआ नाम) था और २ जून को लता के साथ वह और उसका दोस्त संदीप (बदला हुआ नाम) भी व्रजेश्वरी में ही थे। जब यूनिट-३ के अधिकारियों ने लता के समक्ष उसका यह राज खोला तो वह टूट गई।
उसने रवींद्र के साथ अपने नाजायज संबंधों की बात कबूल कर ली। लता ने बताया कि वह ऑटोरिक्शा चलाती थी और उसी दौरान उसकी रवींद्र से दोस्ती हुई थी। रवींद्र भी पेशे से ऑटोरिक्शा चालक था। दोनों की दोस्ती जल्द ही नाजायज संबंधों में तब्दील हो गई। इसकी भनक प्रदीप को लगी तो वह उससे झगड़ा करने लगा और पीटता भी था। २ जून को लता, रवींद्र के साथ व्रजेश्वरी में घूमने गई थी। रवींद्र वहां से लता और संदीप को अपने घर ले गया। उस दौरान लता ने प्रदीप द्वारा पिटाई की बात रवींद्र को बताई थी। इससे रवींद्र आपे से बाहर हो गया। उसने उसी वक्त प्रदीप को ठिकाने लगाने का मन बना लिया। वह बहाने से प्रदीप को अपने घर ले गया। रवींद्र के घर में लता को देखकर प्रदीप आगबबूला हो गया। वह उसे और रवींद्र को गाली देने लगा। जिसके बाद लता, रवींद्र और संदीप ने पहले उसे लात, घूंसे और रॉड से पीट-पीट कर आधमरा कर दिया, फिर धारदार हथियार से उसका गाला रेत दिया।
लाश को लगाया ठिकाने
हत्या के बाद उसकी लाश को चटाई में लपेट कर रिक्शे में डाल उसे बदलापुर-कर्जत मार्ग पर स्थित शेलु स्थित कल्वर्ट (खाड़ी पुल) के नीचे फेंक दिया था। १६ जून को यूनिट-३ की टीम नेरल पुलिस के साथ रवींद्र द्वारा बताई गई जगह पर पहुंची तो वहां उन्हें एक लाश मिली। कपड़े से यह स्पष्ट हो गया कि वह लाश प्रदीप की थी। यूनिट-३ की टीम ने लता, रवींद्र और संदीप को आगे की कार्रवाई के लिए मानपाडा पुलिस को सौंप दिया।