मुख्यपृष्ठसमाचारकाशी में मुस्लिम महिलाओं ने खेली मोहब्बत के गुलाल से भाईचारे की...

काशी में मुस्लिम महिलाओं ने खेली मोहब्बत के गुलाल से भाईचारे की होली!

उमेश गुप्ता / वाराणसी। पूरी दुनिया में रंगों की होली होती है लेकिन काशी में दिल मिलाने की होली खेली जाती है और नफरत की होलिका जलायी जाती है। तभी तो भूत भावन महादेव श्मशान में चिता की भस्म से होली खेलते हैं। काशी की मुस्लिम महिलाओं ने मोहब्बत के गुलाल से एक दूसरे को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने का संदेश भी दे दिया।
कट्टरपंथियों एवं नफरतवादियों द्वारा फैलाये जा रहे नफरत को कड़ी चुनौती काशी की मुस्लिम महिलाओं ने सुभाष भवन लमही में मुहब्बत का गुलाल उड़ाकर दी। नफरत का जहर घोलने वाले इस्लामी कट्टरपंथियों को भी मुहब्बत का पैगाम काशी की मुस्लिम महिलाओं ने दिया।

होली के अवसर पर मुस्लिम महिला फाउण्डेशन एवं विशाल भारत संस्थान के संयुक्त तत्वावधान लमही स्थित सुभाष भवन में “मुस्लिम महिलाओं की गुलालों की होली” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। ढ़ोल की थाप होलियाना गीतों के बीच वातावरण में उड़े गुलालों ने भारत की सांझा संस्कृति का संदेश दिया।
मुस्लिम महिलाएं बेशक नकाब में थी, लेकिन न ही उनको फतवेबाज मुल्लाओं का खौफ था और न ही कट्टरपंथियों की धमकी का डर। बेखौफ होकर अपने पूर्वजों के त्यौहारों में शिरकत करनेवाली मुस्लिम महिलाएं बेहद खुश थीं। एक दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दे रही थीं और गले मिलकर धर्म जाति के भेद को मिटाकर रिश्ते की डोर में बंधने का संदेश दे रही थीं।

मुस्लिम महिलाओं ने चेहरे पर गुलाल लगाया, हंसी ठिठोली की, फिजाओं में गुलाब की पंखुड़ियों ने मोहब्बत की महक बिखेरी और दुनियां को यकजहती का संदेश भेजा। ढोल की थाप पर जब होली गीत शुरू हुआ तब गीत में काशी विश्वनाथ के साथ भगवान श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण को भी मुस्लिम महिलाओं ने शामिल किया। लगे हाथ गीतों में मोदी जी और इन्द्रेश जी भी शामिल हो गए। मुस्लिम महिलाओं ने स्वरचित गीत गाया।

अन्य समाचार