" /> ‘मेरी माली हालत खस्ता है!’ – शगुफ्ता अली

‘मेरी माली हालत खस्ता है!’ – शगुफ्ता अली

शगुफ्ता अली ने अपने करियर की शुरुआत १९८५ में फिल्मों से की थी। इसके बाद वे टीवी की ओर मुड़ गर्इं। ‘परंपरा’, ‘दर्द’, ‘परिवर्तन’, ‘एक वीर दास की अरदास’, ‘जूनून’, ‘वो रहनेवाली महलों की’, ‘संजीवनी’, ‘ससुराल सिमर का’, ‘पुनर्विवाह’, ‘बेपनाह’ और ‘साथ निभाना साथिया’ जैसे शोज में शगुफ्ता अली के किरदारों को बहुत कामयाबी मिली। पिछले ५ वर्षों से शगुफ्ता अली न तो बड़े पर्दे पर नजर आर्इं और न ही छोटे पर्दे पर। आर्थिक तंगी से गुजर रहीं शगुफ्ता अली को घर चलाने के लिए अपने गहनों के साथ ही कार तक को बेचनी पड़ी। पेश है, शगुफ्ता अली से पूजा सामंत की हुई बातचीत के प्रमुख अंश-
 सुना है आप आर्थिक संकट से परेशान हैं और मुश्किल दौर से गुजर रही हैं?
ये वाकई एक कड़वी सच्चाई है। मेरी माली हालत खस्ता है। पिछले ४ वर्षों से मेरे पास कोई काम नहीं है। कोई फिल्म या टीवी शोज का ऑफर नहीं है। ऐसे में मेरे परिवार और मेरा गुजारा कैसे चलेगा? ‘ए’ ग्रेड स्टार्स की बात छोड़िए, परंतु जो बी-सी ग्रेड या चरित्र भूमिकाएं निभानेवाले अदाकार हैं उनका तो रोज काम करो, रोज खाओ वाला मामला है। अधिकांश कलाकारों के लिए अभिनय करना हर दिन कुआं खोदनेवाली बात है। जब मेरे जैसे सीनियर कलाकार जिसने ३-४ वर्षों से काम ही नहीं किया हो उसकी आय कैसे होगी, कैसे घर चलेगा?
 तीन दशकों तक लगातार काम करने के बावजूद आपको अचानक काम मिलना कैसे बंद हो गया?
पिछले तीन-चार वर्षों से मेरे पास जो भी ऑफर्स आए उनमें से मुझे कोई ढंग का ऑफर नहीं लगा। मुझे मेरे रोल पसंद नहीं आए। फिर दो-तीन प्रोजेक्ट्स ऐसे भी रहे, जिनके लिए मैं साइन हो चुकी हूं, पर वे शुरू ही नहीं हुए। इंडस्ट्री में बड़े जोर-शोर से कई फिल्मों के मुहूर्त होते हैं, पर मामला आगे नहीं बढ़ पाता। मेरे प्रोजेक्ट्स भी शुरू होकर आगे नहीं बढ़े इसीलिए काम की भी परेशानियां बढ़ती गर्इं। कहते हैं न, जब संकटों के बादल घिरते हैं तब चारों ओर से घिरते हैं। बस यह मेरा दुर्भाग्य है कि मैं पिछले ३५ वर्षों से लगातार काम करती चली आई हूं, लेकिन पहली बार ढंग का काम मेरे पास नहीं है।
 सुना है, आपका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं चल रहा है?
सिर्पâ मेरा ही नहीं, मेरी मां का भी स्वास्थ्य कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मां का डायबिटीज बहुत बढ़ गया, जिसके चलते उन्हें अस्पताल में दाखिल करना पड़ा। अस्पताल का बिल इतना आया कि मेरी सेविंग्स ही खत्म हो गई। बीमारी, काम का न मिलना, पैसों की कमी के चलते मेरा स्ट्रेस लेवल भी बहुत बढ़ गया। हम दोनों के हेल्थ इशूज बढ़ते गए। जो करीबी रिश्तेदार थे उनसे कोई आर्थिक मदद जब संभव नहीं हुई तो मैंने अपनी कार और गहने बेच दिए। मेरे पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था।
 ३५ वर्षों से अधिक समय तक काम करने के बावजूद आप आर्थिक नियोजन क्यों नहीं कर पार्इं?
मेरा एक बड़ा परिवार है, जिसकी जिम्मेदारी मैं बरसों से संभालती आई हूं। इतने बड़े परिवार में हम सब कभी-न-कभी बीमार पड़े हैं। अस्पतालों और दवाइयों के खर्चे आप समझ सकती हैं। यह सिलसिला बरसों चला है। मुश्किल तो तब हुई जब मुझे काम नहीं मिला और जो जमा-पूंजी थी उसका खर्च होना स्वाभाविक था। बचत किए गए सारे पैसे तो पिछले ४-५ वर्षों में ही खत्म हो गए।
 क्या आपने अपने टीवी, फिल्म बिरादरी के दोस्तों से अपने आर्थिक संकट के बारे में अवगत कराया?
आर्थिक परेशानियों का जिक्र हम सभी से नहीं करते। मैंने अपनी दोस्त अभिनेत्री नीना गुप्ता, अभिनेता सुमित राघवन, अभिनेता सुशांत सिंह से अपनी इस परेशानी के बारे में बताया था। ये तीनों मेरे अच्छे दोस्त हैं। जैसे ही मैंने तीनों को अपनी परेशानी बताई इन तीनों ने मेरी तुरंत मदद भी की। इन तीनों की मैं शुक्रगुजार हूं।
 क्या आपने सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन जैसी संस्थाओं से मदद की गुहार लगाई?
मैंने इन सभी संबंधित संस्थाओं से संपर्वâ किया है। मुझे पूरी उम्मीद है कि वे इसका हल ढूंढेंगे और मुझे मदद मिलकर रहेगी।
 अपने करियर से आप कितनी संतुष्ट हैं?
मैं अपने करियर से संतुष्ट हूं। अभिनय से मुझे खुशी, मान-सम्म्मान और पैसा मिला। देखिए, हर किसी को मुक्कमल जहां नहीं मिलता। मुझे जो भी मिला उसी में मैंने अपनी खुशियां ढूंढी। फिल्म्स, टीवी हर फील्ड में काम किया। प्रोफेशनली मैंने खुद को प्रूव किया। अपने करियर से मुझे कभी कोई शिकायत नहीं रही।
 फिल्म्स और टीवी में आप कितना बदलाव देखती हैं?
फिल्मों में सिर्पâ टेक्निकली बदलाव आया है लेकिन टीवी में बड़ा बदलाव महसूस कर रही हूं। नए कलाकारों में सीनियर कलाकारों के प्रति आदर-सम्म्मान की भावना नहीं रही। नए कलाकारों की सेट पर बदतमीजी देख रही हूं मैं, चैनल का भी इंटरफियरेंस बहुत बढ़ चुका है। लेकिन माहौल अच्छा हो या बुरा मैंने खुद को हर माहौल में ढाल लिया। खुद को एडजस्ट न करके अगर शिकायत करती तो शायद ३५ वर्षों तक नहीं टिक पाती।