मुख्यपृष्ठनए समाचार75 वर्षों से निकाली जाती है पौराणिक झांकी

75 वर्षों से निकाली जाती है पौराणिक झांकी

रवींद्र मिश्रा / मुंबई

मुंबई उमरखाड़ी सार्वजनिक गोकुल काला मंडल द्वारा पिछले 75 वर्षों से पौराणिक झांकी निकाल कर समाज को पौराणिक कथाओं का महत्व समझाने का काम किया जा रहा है। उमरखाड़ी सार्वजनिक गोकुल काला मंडल के अध्यक्ष निवृत्ति फलके के अनुसार, मंडल 1949 से सार्वजनिक गोकुल काला महोत्सव का आयोजन कर रहा है । मंडल के सदस्यों द्वारा विभिन्न झांकियां बनाई जाती हैं तथा बाल कलाकार इन झांकियों में अपने अभिनय द्वारा लोगों के मनोरंजन के साथ-साथ समाज को पौराणिक ज्ञान का महत्व भी समझाने का प्रयास करते हैं।
मंडल की ओर से पहले ये झांकियां बैलगाड़ी पर बनाई जाती थीं, लेकिन अब समय के साथ सब कुछ बदल रहा है। इस वर्ष मंडल की ओर से बनाई गई सभी झांकी बड़े-बड़े ट्रेलर ट्रक पर बनाई गई हैं। पुरानी परंपराओं का ज्ञान कराने के लिए एक झांकी बैलगाड़ी पर भी बनाई गई है। इन झांकियों में सीता हरण, परशुराम सहस्त्रार्जुन युद्ध, ज्ञानेश्वर चांगदेव मिलन, वृंदावन लीला, कंस वध आदि आकर्षण के केंद्र हैं। गोकुल काला उत्सव की यह झांकी यात्रा उमरखाड़ी के गणेश चौक से सुबह 9 बजे प्रस्थान करेगी। डोंगरी, कुंभारवाड़ा, गिरगांव, ठाकुरद्वार, मुंबादेवी, चिंचबंदर होते हुए वापस गणेश चौक पर समाप्त हो जाएगी। इस झांकी में 7 तरह के वाद्य वृंद समूह अपनी मधुर धुन से लोगों के मनोरंजन करेंगे।

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