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एटीएस रिमांड पर नदीम ने उगला राज… सैफुल्ला कर रहा था जिहादी सेना तैयार!

मनोज श्रीवास्तव / लखनऊ
यूपी में पिछले हफ्ते गिरफ्तार हुए जैश-ए-मोहम्मद के दो आतंकवादियों से पूछताछ जारी है। आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े मोहम्मद नदीम और सैफुल्ला के कबूलनामे ने यूपी एटीएस की नींद उड़ा दी है। सैफुल्ला ने बताया कि हम जिहादी सेना तैयार कर रहे थे। पाकिस्तान जाने वाले थे लेकिन उससे पहले ही हम पकड़े गए। उसने बताया कि जांच एजेंसियों के रडार पर न आने के लिए हम लोग कॉल करने के लिए वर्चुअल नंबर का प्रयोग करते थे। हमें निर्देश मिला था कि जब भी ैसेज करो वॉइस मैसेज भेजो। इसके अलावा, हम लोग जब बम बनाने का तरीका सीख रहे थे, तब हमको निर्देश मिले थे कि टाइम बम को पटाखा, सुतली से बनाए जाने वाले देसी बम को रस्सी बोलना है। बता दें कि १२ अगस्त को यूपी एटीएस ने सहारनपुर से आतंकी नदीम को गिरफ्तार किया था। इससे मिले इनपुट के आधार पर फतेहपुर निवासी हबीब उल इस्लाम उर्फ सैफुल्ला को गिरफ्तार किया। फिलहाल दोनों आतंकी एटीएस की रिमांड में है। आतंकियों से पूछताछ में दोनों ने बताया कि कैसे ये आतंक की दुनिया में आए। एटीएस उनके वक्तव्यों की सच्चाई जांचने के लिए दिन-रात एक किए है। एटीएस उन मदरसों और तंजीमों को खंगाल रही है जहां इन दोनों ने समय गुजारे हैैं। जैश-ए-मोहम्मद संगठन के बारे में पूछे जाने पर कहा कि हरकत-उल-मुजाहिदीन नाम भूले तो नहीं है। बता दें कि वर्ष २००० में मसूद अजहर ने हरकत-उल-मुजाहिदीन का बंटवारा कर जैश-ए-मोहम्मद की स्थापना की थी। इसके बाद हरकत-उल-मुजाहिदीन के ज्यादातर सदस्य जैश में शामिल हो गए थे। ये नाम तब चर्चा में आया था,जब भारतीय विमान के यात्रियों को बचाने के लिए मसूद अजहर को छोड़ दिया गया था।
व्हाट्सअप मैसेज से होती थी बात
आतंकी  सैफुल्ला ने बताया कि जब हमें (सैफुल्ला और नदीम) कोई बात करनी होती है, तो हम एक व्हाट्सअप मैसेज जैश-ए-मोहम्मद के झंडे की तस्वीर भेज देते है। तब उधर से हमसे संपर्क हो जाता है। जैश के संपर्क  में कैसे आने के सवाल पर नदीम ने कहा कि काफिरों को खत्म करने के लिए ही अल्लाह ने हमको ये रास्ता दिखाया है। सैफउल्ला ने कहा कि पहले वो खुद्दाम उल-इस्लाम से अल-रहमत ट्रस्ट के माध्यम से जुड़े फिर उससे जैश-ए-मोहम्मद में जुड़ गया। आतंकी नदीम ने बताया कि अभी ट्रेनिंग बाकी थी, उसके बाद हम जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करते। अभी तो केवल हम मदरसों के लड़कों से मिलकर उनको काफिरों के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार कर रहे थे।

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