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विशेष योग में मनेगी नागपंचमी…शुभ मुहूर्त में पूजा करने से दूर होंगे कष्ट

श्रावण मास भगवान भोलेनाथ का प्रिय माह है। नागपंचमी का पर्व इसी माह में मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर नाग पंचमी का पर्व आता है। इसमें नाग देवता की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है। नाग देवता भगवान शिव के गले की शोभा को बढ़ाते हैं। हिंदू धर्म में नाग पंचमी का विशेष महत्व होता है। पौराणिक काल से ही सांपों को देवताओं की तरह पूजा जाता है। ऐसी मान्यता है कि नाग की पूजा करने से सांपों के डसने का भय समाप्त हो जाता है। भगवान भोलेनाथ के गले में भी नाग देवता लिपटे रहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी के दिन नाग देवता की आराधना करने से भक्तों को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और कई अन्य प्रकार के भी शुभ फल प्राप्त होते हैं। ऐसी मान्यता है इस दिन नाग देवता की पूजा करने से घर में सुख और समृद्धि का वास होता है। इस बार नाग पंचमी का त्योहार ०२ अगस्त यानी कल विशेष योग में मनाया जाएगा।
सुहागिन महिलाएं रखती हैं व्रत
नाग पंचमी मंगलवार, २ अगस्त को है और सावन महीने के प्रत्येक मंगलवार को मंगला गौरी व्रत मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति के लिए यह व्रत रखती हैं। इस साल नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ-साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी पूजा की जाएगी। इस दिन नियमानुसार नाग देवता और शिव-पार्वती की पूजा करने से कई गुना अधिक फल मिलता है।
नागपंचमी तिथि
 २ अगस्त, मंगलवार, सुबह ०५.१३ से ०८.४१ बजे तक
नाग पंचमी पूजन विधि
 नाग पंचमी में १२ नागों की पूजा की जाती है। यह इस व्रत के देव माने गए हैं।
 पूजा करने के लिए नाग की सर्प मूर्ति को लकड़ी की चौकी के ऊपर स्थान दें और फिर पूजा करें।
 नाग देवता को हल्दी, रोली (लाल सिंदूर), चावल और पूâल अर्पित करें।
 कच्चा दूध, घी और चीनी मिलाकर नाग देवता को अर्पित करें।

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