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एक पाती बहनों के नाम

सर्वप्रथम सबको प्रणाम,
एक पाती बहनों के नाम
मेरी विनती, मेरा विनय,
मेरा अनुरोध है, बहना
मेरी बातों से सहमत हो, तो
सारी बहनों से कहना,
बस एक राखी अपने हाथों
प्रेषित करना सरहद पर
जहां देश की रक्षा में तैनात,
है, अपना फौजी भाई।
न भूलो उनके समर्पण को,
अमूल्य त्याग और अर्पण को,
हाथों में प्राण लिए हरदम,
तैयार है, दुश्मन से रण को,
ध्यान रहे, बहनों उनकी न
सूनी रहे, कलाई।

-पूरन ठाकुर ‘जबलपुरी’
कल्याण

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