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प्रकृति का बिगड़ा मिजाज… नौ महीने में हुई २,९२३ लोगों की मौत!

-सीएसई की एक रिपोर्ट में चौंकानेवाला खुलासा

सामना संवाददाता / नई दिल्ली

पिछले कई महीनों से हिंदुस्थान में प्रकृति का मिजाज बिगड़ता जा रहा है, जिसमें बाढ़, लू, शीतलहर और चक्रवात जैसी किसी आपदा से हिंदुस्थान और यहां के लोग जूझ रहे हैं। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की एक रिपोर्ट में एक चौंकानेवाला खुलासा भी किया गया है, जिसमें बताया गया है कि पिछले नौ महीने में तकरीबन २,९२३ लोगों की मौत हो गई है।
बता दें कि हिंदुस्थान ने वर्ष २०२३ के नौ महीनों में लगभग हर दिन मौसमी आपदा देखी है। लू, शीत लहर, चक्रवातों और बिजली गिरने से लेकर भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन तक की घटनाओं से भारतीयों को रोज जूझना पड़ा है। इस वर्ष १ जनवरी से ३० सितंबर २०२३ के बीच ८६ प्रतिशत ऐसी घटनाएं हुर्इं, जो देश में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को दर्शाती हैं।
सीएसई की रिपोर्ट बताती है कि इन आपदाओं की वजह से नौ महीने में २,९२३ लोगों की मौत हो गई। १.८४ मिलियन हेक्टेयर (एमएचए) क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुर्इं और ८०,००० से अधिक घर नष्ट हो गए। यही नहीं, इस कारण से ९२,००० से अधिक पशुधन भी काल के गाल में समा गया। रिपोर्ट के अनुसार, चिंताजनक बात यह है कि ये गणनाएं कम हो सकती हैं, क्योंकि प्रत्येक घटना का डेटा एकत्र नहीं किया जाता है और न ही सार्वजनिक संपत्ति या कृषि के नुकसान की गणना की जाती है। इस रिपोर्ट को ३० नवंबर से शुरू होने वाले जलवायु सम्मेलन कॉप-२८ की पृष्ठभूमि में पेश किया गया है। सीएसई की एनवायरनमेंट रिसोर्स यूनिट की सदस्य और इस रिपोर्ट के लेखकों में से एक किरण पांडेय कहती हैं कि २०२२ की तुलना में २०२३ में अधिक तबाही देखी गई है। उदाहरण के लिए २०२३ में पूरे देश में मौसम की चरम घटनाएं बदतर हुई हैं। पिछले साल के ३४ राज्यों की तुलना में इस साल सभी ३६ राज्य और केंद्र शासित प्रदेश प्रभावित हुए हैं। फसल क्षेत्र को नुकसान का दायरा भी बढ़ गया है। बीते साल यह १५ राज्यों तक सीमित था, इस साल २० राज्य प्रभावित हैं।
इस बार सर्दियों में होगा गर्मी का अहसास
यदि इस साल सर्दियों में तापमान से जुड़े आंकड़ों को देखें तो जहां जनवरी का महीना औसत से थोड़ा अधिक गर्म रहा। फरवरी में भी तापमान सामान्य से कहीं ज्यादा दर्ज किया गया। फरवरी का औसत तापमान सामान्य (१९८१-२०१० के औसत तापमान) से १.३६ डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया, वहीं दिन के समय का औसत तापमान १.८६ डिग्री रिकॉर्ड किया गया।
२०५० तक गर्मी से मरनेवालों की संख्या
क्लाइमेट वलनरेबल फोरम के आकलन के मुताबिक, तापमान २ डिग्री बढ़ने पर २०५० तक गर्मी से होने वाली मौतों की संख्या ३७० फीसदी बढ़ जाएगी तथा लोगों के काम के घंटे ५० फीसदी कम हो जाएंगे। बीमार और बुजुर्गों के लिए अधिक गर्मी और उमस खतरनाक साबित हो रही है। मानव जीवन पर इस साल की गर्मी के प्रभाव का अभी पूरा आकलन नहीं किया गया है, लेकिन एक अनुमान के मुताबिक, यूरोप में पिछले साल इससे कम गर्मी ने ६१ हजार लोगों की जान ली थी।

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